Thursday, November 5, 2026

भाजपा से दूर हो रहे कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन, निकाय चुनाव को लेकर सियासी खींचतान

रांची: झारखंड में निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन की नाराजगी अपनी ही पार्टी में दिखने लगी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोल्हान टाइगर का भाजपा से मोहभंग हो गया है, या फिर वे किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं।

नाराजगी की ये है वजह

सूत्रों के अनुसार, चंपाई सोरेन पिछले कुछ समय से भाजपा की बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। खुद चंपाई सोरेन का कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें बैठकों और रायशुमारी की सूचना ही नहीं दी जाती। उनका तर्क है कि जब बुनियादी जानकारी साझा नहीं की जाती, तो सक्रिय भूमिका निभाने का सवाल ही नहीं उठता।

चंपाई सोरेन की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह निकाय चुनाव को बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि उनके क्षेत्र में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया उनकी अनुपस्थिति में पूरी कर ली गई। चंपाई सोरेन ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर कोई प्रभावशाली व्यक्ति ऐसा हो सकता है, जो नहीं चाहता कि वे संगठन में ज्यादा सक्रिय रहें।

पार्टी का पलटवार

चंपाई सोरेन के आरोपों पर आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने पलटवार किया है। उनका कहना है कि चंपाई सोरेन अक्सर मोबाइल फोन अपने पास नहीं रखते या बंद रहता है। बैठकों और कार्यक्रमों की सूचना उनके पीए चंचल गोस्वामी को दी जाती है, इसके बावजूद वे शामिल नहीं होते। शैलेंद्र सिंह ने यह भी दावा किया कि पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह की बैठक समेत सभी अहम बैठकों की जानकारी चंपाई सोरेन को दी गई थी।

विधायक की अनदेखी या संगठनात्मक चूक

चंपाई सोरेन के करीबी सहयोगियों का कहना है कि कोल्हान क्षेत्र से भाजपा का सिर्फ एक ही विधायक है और ऐसे में रायशुमारी में उन्हें शामिल न करना संगठनात्मक संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। सहयोगियों का मानना है कि किसी विधायक के क्षेत्र में प्रत्याशी चयन उनकी अनुपस्थिति में करना उचित नहीं है। जब पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार नहीं करने को लेकर चंपाई सोरेन से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि जब रायशुमारी में विधायक को शामिल ही नहीं किया गया, तो बाद में प्रचार करने का कोई औचित्य नहीं बनता।

उम्मीदवार उतारने से बढ़ा विवाद

मामला तब और गंभीर हो गया, जब आदित्यपुर नगर निगम और सरायकेला नगर पंचायत चुनाव में चंपाई सोरेन ने अपने समर्थकों को चुनाव मैदान में उतार दिया। आदित्यपुर नगर निगम में उनकी समर्थक सुनीता लियांगी चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सरायकेला नगर पंचायत में पार्टी समर्थित प्रत्याशी सुमित चौधरी के खिलाफ चंपाई सोरेन के पूर्व विधायक प्रतिनिधि सानंद आचार्या मैदान में हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या चंपाई सोरेन अलग राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र तैयार कर रहे हैं।

BJP में आने के बाद कम हुई सक्रियता

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले चंपाई सोरेन ने झामुमो छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। धुर्वा के प्रभात तारा मैदान में आयोजित उनके सदस्यता समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया था कि भाजपा उन्हें कोल्हान में अपने बड़े आदिवासी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाएगी। हालांकि, चुनावी नतीजे भाजपा की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। चंपाई सोरेन अपनी सरायकेला सीट तो जीत गए, लेकिन कोल्हान की अन्य सीटों पर पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं दिला सके। घाटशिला सीट पर उनके बेटे बाबूलाल सोरेन की हार और बाद के उपचुनाव में फिर पराजय ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर किया।

आगे की राह क्या

लगातार चुनावी असफलताओं और संगठन के भीतर उपेक्षा के आरोपों के बाद चंपाई सोरेन का भाजपा से मोहभंग साफ नजर आने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह नाराजगी कहीं न कहीं नेतृत्व पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या चंपाई सोरेन भाजपा में अपनी शर्तों पर बने रहेंगे, या फिर किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में ‘घर वापसी’ या तीसरे मोर्चे की राह चुनेंगे। फिलहाल, कोल्हान टाइगर की खामोशी कई सियासी संकेत दे रही है, जिनके मायने आने वाले समय में और साफ होंगे।

एयर नाऊ स्पेशल

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