Thursday, July 23, 2026

हजारीबाग के चर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में तीन को उम्रकैद, 2022 में हुई थी घटना

रांची: झारखंड के चर्चित रूपेश पांडेय मॉब लिंचिंग मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए असलम, गुफरान और कैफ को आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही तीनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सजा से संबंधित आदेश की प्रति कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। अदालत ने इस मामले में कुल 48 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया है।

कब हुई थी घटना?

यह मामला 6 फरवरी 2022 का है। हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र में रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ सरस्वती पूजा के विसर्जन जुलूस को देखने गया था। आरोप है कि पूजा स्थल के पास मोहम्मद असलम अंसारी उर्फ पप्पू खान के नेतृत्व में एक भीड़ जमा हो गई। इसी भीड़ ने रूपेश पांडेय को जबरन अपने साथ ले जाकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई।

27 नामजद आरोपी

घटना के अगले दिन यानी 7 फरवरी 2022 को बरही थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें 27 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। हालांकि शुरुआती पुलिस जांच के बाद केवल पांच आरोपियों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की गई, जिससे पीड़ित परिवार असंतुष्ट था। पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं होने पर मृतक की मां ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सीबीआई जांच की मांग की। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने बरही थाना में दर्ज मामले को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 1/2024 दर्ज की।

CBI चार्जशीट और ट्रायल की पूरी प्रक्रिया

सीबीआई ने 6 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल की। इसके आधार पर 6 अगस्त 2024 को आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित किए गए। इसके बाद 26 अगस्त 2024 से ट्रायल की शुरुआत हुई। ट्रायल के दौरान सीबीआई की ओर से कुल 15 गवाहों को पेश किया गया, जिनमें चार प्रत्यक्षदर्शी, झारखंड पुलिस के दो इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, सीबीआई का एक इंस्पेक्टर, दो मेडिकल ऑफिसर और अन्य स्वतंत्र गवाह शामिल थे। बचाव पक्ष की ओर से चार गवाह पेश किए गए, लेकिन अदालत में उनकी दलीलें आरोपियों को सजा से बचाने में सफल नहीं हो सकीं। अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अहम माना।

अदालत का सख्त रुख

सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने मामले में मजबूती से पक्ष रखा। अदालत ने सभी सबूतों और गवाहियों के आधार पर यह माना कि यह सुनियोजित भीड़ हिंसा का मामला है। इसी आधार पर असलम, गुफरान और कैफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही यह फैसला भीड़ हिंसा के मामलों में एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि ऐसे अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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