दिल्ली: लोकसभा में जारी हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित संबोधन को टाले जाने को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि बुधवार को सदन में हालात ऐसे बन गए थे, जिनमें किसी अप्रत्याशित घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। इसी वजह से प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया गया।
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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 फरवरी को शाम 5 बजे लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। लेकिन विपक्ष की महिला सांसदों के हंगामे के कारण तत्कालीन पीठासीन सभापति संध्या राय ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी। इसके चलते प्रधानमंत्री का संबोधन टाल दिया गया।
स्पीकर ओम बिरला का बयान
गुरुवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री के साथ कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। आशंका को देखते हुए मैंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था।” उन्होंने कहा कि जिस तरह का माहौल बना हुआ था, वह चिंता का विषय था। स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जो कुछ हुआ, वह सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।
जब सदन के नेता प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देने वाले थे, उसी समय विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंच गए।” उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में कोई भी अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को सख्त संदेश देते हुए कहा, “आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह महिला सदस्य प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचीं, वह पूरे देश ने देखा। यह न तो उचित था और न ही सदन की गरिमा के अनुरूप।
सदन की मर्यादा का सवाल
स्पीकर ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हंगामा और अव्यवस्थित आचरण से न सिर्फ सदन का कामकाज बाधित होता है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं को भी नुकसान पहुंचता है। लोकसभा में हंगामे के चलते प्रधानमंत्री का संबोधन टलना और उस पर स्पीकर का यह बयान संसद की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सदन का माहौल शांत होता है या राजनीतिक टकराव और तेज होता है।


