दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है। संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि आने वाले वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद है। इसमें महंगाई, खेती और रोजगार से जुड़े अहम संकेत भी दिए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। इसे देश का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड माना जाता है क्योंकि इसमें बीते साल की आर्थिक स्थिति और आने वाले साल का अनुमान दिया जाता है। सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है।
इकोनॉमिक सर्वे में महंगाई को लेकर भी राहत भरी तस्वीर सामने आई है। सर्वे के अनुसार आने वाले समय में महंगाई दर धीरे-धीरे बढ़ सकती है, लेकिन यह रिजर्व बैंक के तय लक्ष्य 4 प्रतिशत (प्लस-माइनस 2 प्रतिशत) के दायरे में रहने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि महंगाई नियंत्रण में रहने की संभावना जताई गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पहले ही महंगाई को लेकर अपना अनुमान जारी किया था। अच्छी खरीफ फसल और रबी की बेहतर बुआई को देखते हुए दिसंबर 2025 में RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया था। इससे साफ होता है कि कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन महंगाई को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इकोनॉमिक सर्वे में आगे बताया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई दर करीब 3.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में लगभग 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यानी महंगाई RBI के लक्ष्य के आसपास बनी रह सकती है। खेती-किसानी के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार और रबी फसलों की मजबूत बुआई से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है। इससे किसानों की आय बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च बढ़ने की संभावना है, जिसका असर पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ेगा।
रोजगार के मोर्चे पर भी इकोनॉमिक सर्वे ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में नई नौकरियों के अवसर बढ़ सकते हैं। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में रोजगार के मौके बढ़ने की संभावना बताई गई है। सरकार की योजनाओं और निवेश से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इकोनॉमिक सर्वे यह भी संकेत देता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल कीमतें और वैश्विक आर्थिक हालात का असर भारत पर भी पड़ सकता है।


