Thursday, November 5, 2026

देश के नाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन, वंदे मातरम हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर

नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम हम, भारत के लोग देश और विदेश में उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का यह पावन अवसर हमें हमारे देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की स्थिति और दिशा पर विचार करने का अवसर देता है।

हमारे स्वतंत्रता संग्राम की ताकत ने 15 अगस्त 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत स्वतंत्र हुआ। हम अपने राष्ट्र के भाग्य के स्वयं निर्माता बन गए। 26 जनवरी 1950 से हम अपने गणराज्य को सांविधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह लागू हुआ। भारत, जो लोकतंत्र की जन्मभूमि है, शासन प्रणाली से मुक्त हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला है। संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं। संविधान के निर्माता देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को संविधानिक प्रावधानों के माध्यम से मजबूत आधार प्रदान करने में सफल रहे हैं।

उन्होंने कहा, राष्ट्रीय महाकवि सब्रमण्यम भारती ने तमिल भाषा में ‘वंदे मातरम येन्बोम’ अर्थात ‘ हम वंदे मातरम बोलें’ इस गीत रचना करके वंदे मातरम की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस गीत के अनुवाद लोकप्रिय हुए। श्री ऑरबिंदो ने वंदे मातरम का अंग्रेजी अनुवाद किया। ऋषितुल्य बंकिंम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, आज से दो दिन पहले यानी 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्ष 2021 से नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि देशवासी, खासकर युवा, उनकी अदम्य देशभक्ति से प्रेरणा प्राप्त करें। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा ‘जय हिंद’ हमारे राष्ट्र-गौरव का उद्घोष है।

राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, हमारी बहनें और बेटियां परंपरागत रुढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। दस करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं। महिलाएं खेत-खलिहानों से लेकर अंतरिक्ष तक, स्वरोजगार से लेकर सेनाओं तक, अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं।

खेल-कूद के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व स्तर पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। पिछले वर्ष नवंबर में भारत की बेटियों ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप और उसके बाद नेत्रहीन महिला टी20 विश्व कप जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचा है। पिछले ही वर्ष शतरंज विश्व कप का फाइन मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला गया। ये उदाहरण खेल जगत में हमारी बेटियों के वर्चस्व का प्रमाण हैं। ऐसी बेटियों पर देशवासियों को गर्व है।

पंचायती राज संस्थाओं में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 फीसदी है। महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी। विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उनके बढ़ते हुए योगदान से देश महिला पुरुष समानता पर आधारित समावेशी गणतंत्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

एयर नाऊ स्पेशल

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