Monday, September 14, 2026

लालू परिवार की मकर संक्रांति: अलग परंपरा में खास रहा तेजस्वी का बैंगन दान

पटना : मकर संक्रांति के मौके पर इस बार बिहार की राजनीति में तिल-गुड़ से ज्यादा दही-चूड़ा और बैंगन की चर्चा रही। लेकिन बिहार में यह पर्व हमेशा से राजनीति से भी जुड़ा रहा है। इस बार खास चर्चा इसलिए हुई क्योंकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने खिचड़ी में बैंगन दान तो किया, लेकिन अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज से दूरी बना ली। इस कदम को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति सिर्फ पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का भी अवसर माना जाता है। कौन नेता किसके घर दही-चूड़ा खाने गया, किसे बुलाया गया और किसने दूरी बनाई, इन बातों से राजनीतिक रिश्तों का अंदाजा लगाया जाता है। पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के आवास पर इस दिन बड़ा आयोजन होता था, जहां कई नेता जुटते थे। लेकिन इस बार वहां पूरी तरह सन्नाटा रहा, जो खुद में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

लालू-राबड़ी की उस राजनीतिक विरासत की झलक इस बार तेज प्रताप यादव के घर में देखने को मिली। उनके आंगन में दही-चूड़ा का भव्य आयोजन हुआ, जहां राजनीति और परंपरा दोनों का मेल दिखा। यही कारण है कि इस बार की मकर संक्रांति को लालू परिवार की ‘खामोश राजनीति’ के तौर पर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने भले ही खिचड़ी में बैंगन दान कर रस्म पूरी की, लेकिन तेज प्रताप के भोज में शामिल नहीं हुए। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि उन्होंने परंपरा निभाई, लेकिन राजनीतिक मंच साझा नहीं किया। सबसे बड़ा बदलाव यह दिखा कि जहां पहले लालू-राबड़ी आवास राजनीतिक केंद्र होता था, इस बार पूरी रोशनी तेज प्रताप के घर पर थी। उन्होंने इसे सिर्फ पारिवारिक आयोजन नहीं रहने दिया, बल्कि राजनीतिक कार्यक्रम में बदल दिया। उन्होंने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और अपने पिता लालू यादव को भी आमंत्रित किया। कई वरिष्ठ नेता भी पहुंचे, जिससे यह साफ दिखा कि तेज प्रताप अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर भी तरह-तरह की बातें हो रही हैं। दही-चूड़ा की राजनीति अनजाने में तेज प्रताप के हिस्से चली गई। तेज प्रताप ने तेजस्वी के बच्चों को गोद में लेकर तस्वीरें भी खिंचवाईं, जिससे भावनात्मक संदेश देने की कोशिश दिखी। लेकिन राजनीतिक दूरी इससे कम होती नहीं दिखी। अब राजनीतिक विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि तेज प्रताप को अपने दम पर राजनीति में मजबूत होना होगा, न कि सिर्फ पिता के नाम पर। उन्हें अपनी अलग पहचान बनानी होगी।
अंत में सबसे दिलचस्प बात रही, खिचड़ी में बैंगन दान। आमतौर पर लोग आलू, दाल, चावल, गाजर या छीमी दान करते हैं, लेकिन बैंगन दान करने की परंपरा बहुत कम देखी गई है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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