देश : संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा है। 19 दिसंबर तक चलने वाले सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सत्र से उम्मीद की जा रही है कि यह लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।
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सत्र का कार्यक्रम और उम्मीदें
किरेन रिजिजू ने कहा कि शीतकालीन सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र सार्थक और उत्पादक रहेगा। संसद का यह सत्र इस साल का आखिरी सत्र होगा है, जिसमें सरकार आमतौर पर लंबित बिलों को पारित कराने और नए प्रस्तावों पर चर्चा करने की कोशिश करती है। इससे पहले संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला था। सत्र के काफी हंगामेदार रहने के कारण पूरे सत्र में केवल 21 बैठकें हुईं, इस दौरान संसद का ज्यादातर समय विपक्ष के हंगामे और विभिन्न मुद्दों पर विवाद में निकल गया। लोकसभा में 120 घंटे की जगह केवल 37 घंटे ही चर्चा हो सकी। तो वहीं, राज्यसभा में 41 घंटे बहस हुई। मानसून सत्र के दौरान ही केंद्र सरकार 130वां ‘संविधान संशोधन बिल’ पेश किया था, जिसमें प्रावधान था कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी अपराध में गिरफ्तार या 30 दिन की हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा। इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया। इस सत्र के शुरू होते ही 22 जुलाई को तत्कालीन उप राष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
अब नजरें संसद के शीतकालीन सत्र पर हैं। माना जा रहा है कि इस बार सरकार कई अहम विधेयक पेश कर सकती है, जिनमें आर्थिक सुधार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख होंगे। विपक्ष भी अपनी रणनीति के साथ तैयार है। जनता की उम्मीद यही है कि इस बार संसद में बहस और नीतिगत चर्चा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और देश के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।


