बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में शुक्रवार को कथित तौर पर एक घर में जुमे की नमाज़ पढ़ने के मामले में तक़रीबन 12 लोगों को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है. पुलिस का दावा है कि निजी आवास को बिना आधिकारिक अनुमति धार्मिक स्थान में परिवर्तित किया जा रहा था.
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मामले में पुलिस का बयान
दक्षिणी बरेली की एएसपी अंशिका वर्मा ने रविवार को बयान दिया, “16 जनवरी को थाना विशारतगंज स्थित ग्राम मोहम्मदगंज से यह सूचना प्राप्त हुई कि कुछ लोग अपने निजी आवास को धार्मिक स्थान में परिवर्तित कर, बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के धार्मिक गतिविधियाँ चला रहे थे.”
उन्होंने कहा, “शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए और किसी भी संभावित विवाद की आशंका को देखते हुए थाना पुलिस टीम ने 15 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, जिसमें 12 लोगों के ख़िलाफ़ बीएनएसएस की धारा 170, 126 और 135 के तहत कार्रवाई की गई.” उन्होंने बताया, “मौक़े से फ़रार तीन लोगों के ख़िलाफ़ बीएनएसएस की धारा 126 और 135 के तहत कार्रवाई की गई है. इसके साथ ही संभावित विवाद को देखते हुए सभी संबंधित व्यक्तियों को पुलिस ने हिदायत दी है कि इस प्रकार की हरकत दोबारा न की जाए.”
बीएनएसएस की धाराओं में मामला दर्ज
बीएनएसएस यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (जिसे पहले सीआरपीसी कहा जाता था) की धारा 170 पुलिस को यह शक्ति देती है कि वह अपराध होने से रोकने के लिए किसी को गिरफ़्तार कर सकती है, गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति को ज़मानत लेनी होती है. वहीं इसकी धारा 126 किसी व्यक्ति के लिए अनुचित तौर पर अवरोध पैदा करने या उन्हें अनुचित तौर पर बंद रखने से जुड़े अपराधों की व्याख्या करता है.
जबकि बीएनएसएस का सेक्शन 135 किसी व्यक्ति को ग़लत तरीके़ से बंद करने के प्रयास से जुड़े अपराध की व्याख्या करता है. जिस घर में नमाज़ पढ़ी गई उसकी मालकिन मिन्तो बेगम ने मीडिया को बताया कि उनके घर में पहली बार सामूहिक नमाज़ पढ़ी गई, इससे पहले उनके घर में कभी भी सामूहिक नमाज़ नहीं पढ़ी गई थी.
वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, सामूहिक रूप से नमाज़ अदा करने का वीडियो बनाकर पुलिस को दिया गया था. इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वहां पर नमाज़ अदा करते हुए 12 लोगों को हिरासत में लिया जबकि तीन लोग वहां से फ़रार हो गए थे. पुलिस ने घर में सामूहिक नमाज़ पढ़ने की लिखित अनुमति दिखाने को कहा. पुलिस ने 12 लोगों का शांति भंग में चालान किया, जिन्हें शनिवार के दिन मजिस्ट्रेट से ज़मानत मिल गई. वहीं फ़रार हुए तीन लोगों की पुलिस तलाश कर रही है.
गांव में नहीं है कोई मस्जिद और मदरसा
वहीं एक स्थानीय व्यक्ति तारिक़ ख़ान का कहना है कि उनके गांव में कोई मंदिर, मस्जिद और मदरसा नहीं है. उन्होंने बताया, “नमाज़ यहां 30 सालों से घरों में पढ़ी जा रही है. यहां पर न कोई मंदिर, मस्जिद या मदरसा है. किसी तरह की पूजा-पाठ, कांवड़ यात्रा या नमाज़ पर यहां पाबंदी नहीं रही है. यहां पर सामूहिक नमाज़ पढ़ने को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ.”

