पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार से अपनी सद्भाव यात्रा की शुरुआत कर दी। इसे निशांत कुमार के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। यात्रा को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिला। यात्रा शुरू होने से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं ने शंखनाद और बिगुल बजाकर निशांत कुमार का स्वागत किया। यात्रा में इस्तेमाल होने वाले वाहन को फूलों से सजाया गया था। कई जगहों पर स्वागत कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।
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उसी निश्चय रथ से निकले निशांत
इस यात्रा की खास बात यह है कि निशांत कुमार उसी निश्चय रथ का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पहले नीतीश कुमार अपनी यात्राएं करते रहे हैं। रथ में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है और न ही उस पर निशांत कुमार की कोई विशेष ब्रांडिंग की गई है। निशांत कुमार जदयू कार्यालय पहुंचे, जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और विधायक दल के नेता श्रवण कुमार भी मौजूद रहे। यहीं से उन्होंने निश्चय रथ पर सवार होकर यात्रा की औपचारिक शुरुआत की।
यात्रा शुरू करने से पहले निशांत कुमार ने 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचकर अपने पिता से आशीर्वाद लिया।
कई जगहों पर स्वागत कार्यक्रम
यात्रा के पहले दिन कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनमें बजरंग चौक (ओवर ब्रिज), वैशाली जिला कार्यालय (जेल गेट के पास), सकरी चौक, मुजफ्फरपुर, मंगराही के महेंद्र चौक, पूर्वी चंपारण प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी कार्यकर्ता शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ जनसंपर्क अभियान को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यात्रा के दूसरे दिन यानी 4 मई को निशांत कुमार पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर पहुंचेंगे। वहां वे जंगल सफारी भी करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह बना हुआ है।
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चंपारण से शुरुआत के राजनीतिक मायने
निशांत कुमार ने अपनी यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण से की है, जो महात्मा गांधी की कर्मभूमि मानी जाती है। यह इलाका नीतीश कुमार के लिए भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा है। नीतीश कुमार ने भी अपने राजनीतिक जीवन की कई अहम यात्राओं की शुरुआत चंपारण से ही की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि निशांत कुमार भी अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकेत दे रहे हैं।


