रांची : उपेंद्र पाठक द्वारा संकलित पुस्तक “संचित विचार” का विमोचन सोमवार को राज्यपाल संतोष गंगवार ने किया। इस अवसर पर डॉ एच पी नारायण, अरविंद कुमार, रंजय ओझा, अशोक कुमार राय, सुधांशु पाठक, संध्या पाठक, नीलम पाठक, वेदांत कौस्तव, तेजस कुमार भी उपस्थित थे।
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इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए ये पुस्तक उपयोगी हो सकता है। वहीं उपेन्द्र पाठक ने कहा विचार कभी समाप्त नहीं होते, वे समय के साथ आगे बढ़ते हुए युवा पीढ़ी को नई दिशा देते रहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई की या संकलन युवा पीढ़ी के जीवन में सकारात्मक और प्रेरणा का एक छोटा सा स्रोत बने।
उपेन्द्र पाठक ने अपना जीवन जनसेवा, सामाजिक दायित्व एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन को समर्पित किया है। संयुक्त बिहार के समय वे बिहार मत्स्य कर्मचारी संघ के महासचिव रहे तथा मत्स्य विभाग में दीर्घकाल तक अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। वर्ष 2001 में वे मत्स्य विभाग से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के उपरांत भी उन्होंने समाज एवं धर्म के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। वे राँची के साकेत विहार स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर के अध्यक्ष के रूप में दीर्घकाल तक सेवा करते रहे तथा वर्तमान में मंदिर के संरक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
अध्ययन, चिंतन तथा प्रेरणादायी साहित्य के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है। वर्षों से उन्होंने विभिन्न ग्रंथों, महापुरुषों के विचारों तथा प्रेरक वचनों का संग्रह किया है। प्रस्तुत संकलन उसी साधना, अध्ययन और जीवनानुभव का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सकारात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों तथा आत्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करना है। उनका विश्वास है कि श्रेष्ठ विचार व्यक्ति के जीवन को दिशा देते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

