नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से आईडीबीआई बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी बेचने की मंज़ूरी के बाद राहुल गांधी ने आईडीबीआई के कर्मचारियों के नाम एक खुला पत्र लिखा है. राहुल गांधी ने इस चिट्ठी में लिखा है कि फ़िलहाल सरकार और एलआईसी के पास इस बैंक की 95 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. बिक्री के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 34 फ़ीसदी रह जाएगी.
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इसमें राहुल गांधी ने लिखा, “पिछले साल मार्च में आपमें से कुछ लोग संसद भवन में मुझसे मिलने आए थे. आपने मुझसे एक सीधा सवाल पूछा था कि जिस बैंक को आपने मुनाफ़े में पहुंचाया है, सरकार उसे क्यों बेच रही है? मैंने यह सवाल लोकसभा में उठाया. मैंने पूछा कि एक मुनाफ़े में चल रहे सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है. सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया. अब उसने आईडीबीआई बैंक को कनाडा की कंपनी फ़ेयरफ़ैक्स को बेचने का फ़ैसला किया है.”
राहुल गांधी ने लिखा, “आईडीबीआई के निजी हाथों में जाने के बाद एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की व्यवस्था ख़त्म हो जाएगी. आपकी सेवा शर्तें पहले ही कमज़ोर हो चुकी हैं और अब उनका आखिरी सुरक्षा कवच भी ख़त्म हो जाएगा.”
निर्मला सीतारमण ने दिया ये जवाब
सोशल मीडिया एक्स पर इस मामले में राहुल गांधी की पोस्ट को शेयर करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोप लगाया, “हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल अपनी निजी संस्थाओं की तरह किया है. और बैंक कर्मचारियों पर अपनी मर्जी से कर्ज देने का दबाव बनाया है. इस दौरान कर्ज देने से जुड़े ज़रूरी नियमों और मानकों को भी दरकिनार किया गया है.”
बैंक अधिकारियों के संगठन ने यहा
आईडीबीआई बैंक अधिकारियों के संगठन ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का धन्यवाद किया है. संगठन ने एक्स पर लिखा, “भारत के औद्योगीकरण को वित्तपोषित करने के लिए नेहरू जी ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना की थी, आज उसी संस्थान को धोखे से बेचा जा रहा है. राहुल गांधी जी, आपका सहयोग मिलने से हमारी लड़ने की ताकत दोगुनी हो चुकी है और आखरी साँस तक हम देश की ऐतिहासिक संस्था आईडीबीआई को बचाने के लिए लड़ाई करेंगे.”

