बिहार : एक ऐसी लड़की जिसने पिछले एक, ढेड़ दशक में अपनी मधुर आवाज और सुरू से लोगों को जोड़े रखा , और अब उनका नाम सुनते ही मन में एक सूकून, मिठास और भारतीय संस्कृति की झलक उभर आती है, वो है मैथिली ठाकुर और अब वो राजनीति के मैदान में उतरकर लोगों के दिल जीतने की तैयारी कर रही है। बिहार के मधुबनी ज़िले के बेनीपट्टी गांव में 25 जुलाई 2000 को जन्मी मैथिली ठाकुर का जीवन सफर किसी कहानी से कम नहीं है। बचपन से ही संगीत उनके खून में था। उनके पिता एक संगीत शिक्षक हैं, जबकि मां ने हमेशा परिवार को संभाला और अपनी बेटी के सपनों को उड़ान दी। उन्के दो भाई ऋशव और आयाची ठाकुर ,भी संगीत में उनकी टीम का हिस्सा हैं। यह परिवार पूरी तरह संगीत के लिए जीता है। उनके घर में भी सुबह, शाम रियाज़ की आवाज़ें गूंजती थीं, और इसी माहौल ने मैथिली को एक गायिका बनने की उम्मीद दिलाई। मैथिली ने केवल चार साल की उम्र में गाना शुरू किया था।
मैथिली ठाकुर ने junior Indian idol में भी लिया भाग
धीरे-धीरे मैथिली ने अपनी पहचान बनाई। स्कूल और कार्यक्रमों से लेकर बड़े मंचों तक, उनकी आवाज़ ने हर किसी को प्रभावित किया। मैथिली ठाकुर ने junior Indian idol में भी भाग लिया था और उन्होंने टीवी रियलिटी शो rising star में भाग लिया, तो पूरे देश ने पहली बार उनके सुरों को महसूस किया। वह शो की फाइनलिस्ट बनीं और अपनी मीठी आवाज़, शांत स्वभाव और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। शो के खत्म होने से पहले ही उनके यूट्यूब और सोशल मीडिया वीडियो वायरल हो गए। उनके लोकगीत, भजन, और मैथिली भाषा के गीतों को करोड़ों व्यूज़ मिले। उनकी गायकी में न सिर्फ मिठास थी बल्कि उसमें अपनी मिट्टी की खुशबू और संस्कृति की गहराई भी थी।
मैथिली के प्रसिध्द गाने
मैथिली ठाकुर आज हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, संस्कृत, और बांग्ला जैसी कई भाषाओं में गाती हैं। उनके प्रसिद्ध गीत जैसे ऐगिरी नंदिनी, रूद्राष्टक, राम को देख कर, और होली रे रसिया ने उन्हें देश-विदेश तक पहचान दिलाई। लोग कहते हैं कि मैथिली सिर्फ गाती नहीं, बल्कि हर गीत में जान डाल देती हैं। यही वजह है कि उन्हें मिथिला की पहचान कहा जाता है। जब वह मैथिली भाषा में गाती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वह अपनी मिट्टी से बातें कर रही हों। उन्होंने मैथिली, भोजपुरी और भारतीय लोक परंपरा को नई पहचान दिलाई है।
राजनीति में मैथिली का कदम
अब बात करते हैं उनके राजनीति में आने की। अब जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी यानी (BJP) जॉइन किया , तो यह खबर पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा ने उन्हें अलीनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया। यह वही सीट है जहाँ 2020 में भाजपा समर्थित VIP के मिश्री लाल यादव ने आरजेडी के बिनोद मिश्रा को हराकर जीत हासिल की थी। भाजपा एक नए, लोकप्रिय और साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार की तलाश की, और मिथिला की बेटी मैथिली ठाकुर पर भरोसा जताया।
अलिनगर में लोगों की संख्या
मार्च 2022 में VIP के एनडीए से अलग होने के बाद मिश्री लाल यादव भाजपा में शामिल हो गए।उनका विवादों में भी घिरा रहना चर्चा में था जो मारपीट के वजह से हुआ था। 2020 के विधानसभा चुनाव में अलीनगर में 2 लाख से ज्यादा पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर लगभग 3 लाख के करीब पहुंच गए थे। 2020 के आंकड़ों के अनुसार 12% अनुसूचित जाति के मतदाता थे, यहाँ यादव की संख्या करीब 1 लाख रही है, ब्राह्मणों की संख्या करीब 3 लाख और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक यानी करीब 4 लाख तक की है। यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है, यहां कोई भी शहरी मतदाता नहीं है।
अलीनगर सीट पर जातिगत समीकरण की भी अहम भूमिका रही है। भाजपा को उम्मीद है कि मैथिली ठाकुर की ब्राह्मण पृष्ठभूमि, महिला मतदाताओं में उनकी लोकप्रियता, और मिथिलांचल में उनके सांस्कृतिक जुड़ाव से इस बार भाजपा को बढ़त मिल सकती है। यह सीट बिहार की राजनीति में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां हर चुनाव में सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत छवि दोनों अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
मैथिली ठाकुर एक लोकप्रिय चेहरा
भाजपा का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। मिथिलांचल क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और इसके लिए मैथिली ठाकुर जैसा लोकप्रिय चेहरा पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकता है। वह युवाओं, महिलाओं और सांस्कृतिक वर्गों में काफी सम्मानित हैं। खुद मैथिली कहती हैं कि राजनीति में आने का फैसला उन्होंने सोच-समझकर लिया है। उन्होंने कहा था ,मैं बिहार की बेटी हूं और अपने राज्य के लिए कुछ करना चाहती हूं। केवल गाना गाकर संस्कृति को बचाना काफी नहीं, अब उस संस्कृति को सम्मान दिलाने के लिए राजनीति में आना भी जरूरी है। उनके लिए राजनीति किसी पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
मोदी ने भी की मैथिली की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले उनकी गायकी की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मैथिली ठाकुर जैसी युवा कलाकार भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाई दे रही हैं। मैथिली खुद कहती हैं कि मोदी के अनुशासन, कार्यशैली और देश को आगे बढ़ाने की सोच ने उन्हें प्रेरित किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली को भी सम्मान दिया है। राजनीति में कदम रखने का मतलब मैथिली जानती हैं कि अब उनके लिए रास्ता आसान नहीं होगा। संगीत की दुनिया में उन्हें भरपूर प्यार मिला है, लेकिन राजनीति में उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ेगा। विरोधी दलों का कहना है कि भाजपा ने सिर्फ प्रचार के लिए उन्हें टिकट दिया है, जबकि उनके समर्थक कहते हैं कि बिहार को ऐसी नई सोच और अच्छे और शांती से काम करने वाले नेताओं की जरूरत है।
मिथिला की बेटी मैथिली
अलीनगर की जनता उन्हें न सिर्फ एक गायिका बल्कि मिथिला की बेटी के रूप में भी देखती है।
मैथिली ठाकुर के संघर्ष, समर्पण और सेवा की भी है ,जहाँ एक गायिका अब अपनी आवाज़ से नहीं, बल्कि अपने कामों से लोगों के दिल जीतने की कोशिश करेंगी।


