ढाका : बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 24 घंटे में दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या और एक महिला के साथ यौन हिंसा ने हालात की गंभीरता को उजागर किया है। इन वारदातों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय, सरकार इन्हें पिछले एक महीने में सामने आई हिंसा की कड़ी मान रहे हैं, जो चुनाव से पहले प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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देश में 12 फरवरी को आम चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में लगातार हिंसक घटनाएं न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर भय और असुरक्षा की भावना भी बढ़ाती हैं। पिछले तीन हफ्तों में हिंदू समुदाय के खिलाफ सामने आई यह पांचवीं बड़ी घटना बताई जा रही है।
24 घंटे में दो हिंदुओं की हत्या, इलाके में दहशत
सोमवार शाम मोनिरामपुर इलाके में 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात जेस्सोर जिले के कपालिया बाजार में शाम करीब 5:45 बजे हुई। राणा प्रताप बैरागी एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और नराइल जिले से प्रकाशित दैनिक अखबार बीडी खबर के कार्यकारी संपादक भी थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मोटरसाइकिल सवार हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए, जहां पहले बहस हुई और फिर बेहद नजदीक से गोली मार दी गई।
वहीं, कालीगंज क्षेत्र में एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और सार्वजनिक अपमान की बेहद अमानवीय घटना सामने आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया, फिर उसे पेड़ से बांधकर पीटा गया, उसके बाल काट दिए गए और इस पूरी दरिंदगी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। यह घटना न केवल महिला सुरक्षा बल्कि डिजिटल अपराध और सामाजिक भय के फैलाव का भी उदाहरण बन गई है।
जमीन विवाद बना हिंसा की वजह
पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, उसने शाहीन और उसके भाई से दो कट्ठा जमीन और एक दो-मंजिला मकान खरीदा था, जिसके बदले उसने करीब 20 लाख टका का भुगतान किया था। कुछ समय बाद आरोपियों ने उससे अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू कर दी। जब महिला ने इस अवैध मांग का विरोध किया, तो उसे धमकियां दी जाने लगीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार शाम शाहीन अपने सहयोगी हसन के साथ जबरन महिला के घर में घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उससे 50 हजार टका की मांग की गई। उस समय घर में मौजूद मेहमानों के साथ भी मारपीट की गई।
वीडियो बनाकर फैलाया गया डर
शिकायत में बताया गया है कि जब महिला ने मदद के लिए चिल्लाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे पेड़ से बांध दिया और मारपीट करते रहे। महिला को तब तक पीटा गया, जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। इस दौरान पूरी घटना का वीडियो बनाया गया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में वीडियो बनाना डर फैलाने और पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ने की एक नई रणनीति बनती जा रही है।
अस्पताल और पुलिस की भूमिका
बेहोशी की हालत में महिला को स्थानीय लोगों ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआत में पीड़िता ने दुष्कर्म की जानकारी नहीं दी थी, लेकिन मेडिकल जांच में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई। होश में आने के बाद महिला ने कालीगंज थाना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बयान दर्ज कर जांच शुरू करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि केवल भरोसा काफी नहीं है, बल्कि त्वरित गिरफ्तारी और सख्त सजा जरूरी है।
अलग-अलग घटनाएं या एक ही पैटर्न?
बीते एक महीने में अल्पसंख्यकों की हत्याएं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं। इनमें एक समान पैटर्न दिखता है। जैसे जमीन विवाद, आर्थिक दबाव, धमकी, और कमजोर कानून-व्यवस्था का फायदा उठाना। चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं।
बांग्लादेश में सामने आ रही ये घटनाएं केवल आपराधिक मामले नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यक सुरक्षा और महिला अधिकारों की गंभीर परीक्षा हैं। जब तक दोषियों की गिरफ्तारी और त्वरित न्याय नहीं होगा, तब तक भय का माहौल बना रहेगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई यह तय करेगी कि चुनाव से पहले देश में सुरक्षा और भरोसा बहाल हो पाता है या नहीं।


