रांची: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ), रांची के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 5 और 6 फरवरी को जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों को एक साझा मंच प्रदान करना था, ताकि सतत तकनीकों और समाधान पर विचार-विमर्श किया जा सके। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से 35 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
Highlights:
उद्घाटन सत्र में जलवायु संकट पर जोर
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में आईआईआईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की समस्या बन चुकी है। पिघलते ग्लेशियर, बढ़ता वैश्विक तापमान, अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में गिरावट इसके स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीतियों, वैज्ञानिक शोध और तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही जलवायु अध्ययन और जल संसाधन प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को समय की मांग बताया।
उद्योग और अकादमिक जगत के सहयोग पर जोर
सम्मेलन में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), रांची के चीफ जनरल मैनेजर निलेश सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत के इस्पात क्षेत्र में इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार और सतत औद्योगिक प्रक्रियाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआई आधारित समाधान ऊर्जा और जल उपयोग को बेहतर बनाने, उत्सर्जन घटाने और कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक पर चर्चा
दूरसंचार विभाग (डीओटी) के उप महानिदेशक (डीडीजी) विजय भूषण प्रसाद ने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और एआई आधारित तकनीकों के महत्व पर बात रखी। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अधिक है, ऐसे में तकनीक आधारित समाधान बेहद जरूरी हैं। सम्मेलन का मुख्य भाषण प्रो. खतुआ ने दिया, जिसमें उन्होंने जलवायु अनुकूलन और सतत जल प्रबंधन रणनीतियों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। सम्मेलन के उद्घाटन भाषण सीयूजे के डीन (अकादमिक) प्रो. मनोज कुमार ने दिया। आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा वारवाड़े ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि सम्मेलन को देशभर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने जानकारी दी कि तीन प्रमुख विषयों के अंतर्गत कुल 35 शोध पत्र तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए गए।
समापन सत्र में एआई आधारित समाधानों की सराहना
समापन सत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच जल उपलब्धता सुनिश्चित करने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर एआई आधारित समाधानों के माध्यम से व्यापक चर्चा की गई। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई दी और भविष्य के शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं दीं।
सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे सम्मेलन के संयोजक डॉ. पी. के. पारही ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सह-संयोजक डॉ. बिरेंद्र भारती सहित प्रो. के. बी. पांडा, प्रो. संगरंग मेधाकर, प्रो. आर. के. डे, प्रो. तपन बसंतिया, प्रो. देवरत सिंह, प्रो. सुभाष यादव, प्रो. जी. पी. सिंह, प्रो. सुचित्रा सेन चौधरी, आयोजन समिति के सदस्य, शिक्षक, शोधकर्ता और छात्र उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय भागीदारी से सम्मेलन को बड़ी सफलता मिली।


