सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के सर्कुलर को चुनौती देने वाली TMC की याचिका ख़ारिज, दखल देने से कोर्ट का इंकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को टीएमसी को बड़ा झटका देते हुए मतगणना प्रक्रिया से जुड़े चुनाव आयोग के सर्कुलर से जुड़ी आपत्ति खारिज कर दी। अदालत ने केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के निर्देश को बरकरार रखा। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी किया गया सर्कुलर ही लागू रहेगा और इस मामले में अलग से किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। यह फैसला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष बेंच ने सुनाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देश पहले से स्पष्ट हैं और उसी के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती

दरअसल, टीएमसी ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें सिर्फ केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने के चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया गया था। राज्य सरकार का कहना था कि इस फैसले से राज्य प्रशासन की भूमिका सीमित हो रही है। वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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 कोलकाता हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि केंद्रीय कर्मचारियों पर राजनीतिक प्रभाव होने के आरोप केवल आशंका पर आधारित हैं और इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। यदि किसी पक्ष को मतगणना प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो वह चुनाव याचिका के जरिए मामला उठा सकता है।

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सीनियर वकील ने रखा पक्ष

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील डी.एस. नायडू ने अदालत में कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास पूरी जिम्मेदारी और अधिकार होता है। उन्होंने बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर राज्य सरकार के कैडर का अधिकारी होता है और पूरी मतगणना प्रक्रिया उसकी निगरानी में होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर उम्मीदवार के पास अपना काउंटिंग एजेंट होता है, जो मतगणना की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता है। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका जताना गलत और बेबुनियाद है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब चुनाव आयोग का 30 अप्रैल 2026 का सर्कुलर ही प्रभावी रहेगा। इसका मतलब है कि मतगणना के दौरान केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों की नियुक्ति काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में की जा सकेगी।

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