रांची: झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. इन कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनकी दुर्गा पूजा तो तंगी में गुजरी ही, अब दीपावली का त्योहार भी अंधेरे में बीतने की आशंका सता रही है. इसे लेकर झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.
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अनुबंध समाप्त, प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी बनी वजह
संघ के अनुसार, जेप-आईटी (JAP-IT) द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों के साथ पूर्ववर्ती अनुबंध जुलाई 2026 में ही समाप्त हो चुका है. इसके बाद से अनुबंध के विस्तार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. इसके अलावा, झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल, 2025 के तहत नई संविदा को अंतिम रूप देने की स्थिति भी अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है. प्रशासनिक तंत्र की इस सुस्ती और देरी का खामियाजा उन जमीनी कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जो लगातार बिना रुके सरकारी कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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वहीं कर्मचारी संघ ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा है कि जब विभागों द्वारा कर्मचारियों से लगातार और नियमित रूप से काम लिया जा रहा है, तो समय पर उनके मानदेय या पारिश्रमिक के भुगतान की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? कागजी प्रक्रिया और अनुबंध की सुस्त रफ्तार का बोझ मेहनतकश कर्मचारियों के परिवारों पर डालना पूरी तरह से अनुचित है.
बच्चों की पढ़ाई और दवाइयों का खर्च चलाना हुआ मुश्किल
कंप्यूटर संचालन, डेटा एंट्री, सरकारी अभिलेखों के रख-रखाव और पत्राचार जैसे अहम कार्यालयी कार्यों को संभालने वाले ये कर्मचारी सीमित मानदेय पर काम करते हैं. लगातार तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण इनके सामने कई विकट समस्याएं खड़ी हो गई हैं. घर का रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. वहीं स्कूल की फीस और किताबों का भुगतान न होने से बच्चों की पढ़ाई खतरे में है. साथ ही घर के बीमार सदस्यों के लिए दवाइयां खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं.
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वेतन भुगतान में देरी की समीक्षा की मांग
झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं. जिनमें अक्टूबर तक के सभी बकाया वेतन का भुगतान दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले सुनिश्चित करने. जेप-आईटी और संबंधित एजेंसियों के बीच अनुबंध विस्तार या नई संविदा की प्रक्रिया को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने. इसके साथ ही भविष्य में यदि एजेंसी बदलती है या अनुबंध समाप्त होता है, तब भी कर्मचारियों का वेतन किसी भी हाल में बाधित न हो, ऐसी पुख्ता व्यवस्था बनाने. साथ ही वेतन भुगतान में हुई अनावश्यक देरी की उच्चस्तरीय समीक्षा कर इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग शामिल है.
मुख्यमंत्री वेतन भुगतान कराने की मांग
संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मार्मिक अपील की है कि वे इस मामले में खुद संज्ञान लें और तत्काल वेतन भुगतान का आदेश जारी कर हजारों परिवारों को राहत पहुंचाएं. कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी तरह की अतिरिक्त सुविधा या रियायत नहीं मांग रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपने मेहनत का हक मांग रहे हैं.
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