नई दिल्ली: I-PAC रेड से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। एजेंसी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
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ED ने क्या आरोप लगाए?
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में कहा है कि I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने जांच में हस्तक्षेप किया। एजेंसी का आरोप है कि कार्रवाई में बाधा डाली गई, जिससे जांच प्रभावित हुई। ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के DGP और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर तुरंत सुनवाई करने के बजाय इसे 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। अब अगली सुनवाई में कोर्ट ED की याचिका और राज्य पक्ष की दलीलें सुनेगा।
I-PAC क्या है?
I-PAC यानी भारतीय राजनीतिक कार्रवाई समिति एक राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन से जुड़ी संस्था है, जो विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करती है। इस संस्था के कार्यालय पर छापेमारी को लेकर ही विवाद शुरू हुआ। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब सभी की नजर 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने से मामले का फैसला फिलहाल आगे बढ़ गया है। अगली तारीख पर कोर्ट की सुनवाई से इस विवाद में आगे की दिशा साफ हो सकती है। फिलहाल ED और राज्य सरकार दोनों अपने-अपने पक्ष की तैयारी में जुटे हैं।


