Friday, October 30, 2026

I-PAC छापेमारी मामले में ED अधिकारियों के खिलाफ हुई FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली : I-PAC छापेमारी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने साफ निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर पर रोक रहेगी। साथ ही कोर्ट ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को जिन परिसरों में छापेमारी हुई थी, वहां की CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा कथित हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया 

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी I-PAC और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकानों पर ED की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर जारी किया गया है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला बेहद गंभीर है। अदालत ने माना कि याचिका में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राज्य एजेंसियों के हस्तक्षेप से जुड़ा अहम सवाल उठाया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि इस तरह के मामलों की जांच नहीं की गई, तो देश में कानून व्यवस्था और शासन प्रणाली पर गंभीर असर पड़ेगा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की आड़ में अपराधियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

CBI जांच और सबूत लौटाने की मांग

ED ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही ED ने यह भी अनुरोध किया है कि I-PAC से जुड़े परिसरों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित तौर पर लिए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत वापस कराए जाएं। इससे पहले ED ने इसी तरह की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर की थी, जिसे केंद्रीय एजेंसी के अनुरोध पर बुधवार को स्थगित कर दिया गया था। हाई कोर्ट में इससे पहले हंगामे के कारण सुनवाई नहीं हो पाई थी।

दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे ED की याचिकाओं पर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला केंद्र और राज्य एजेंसियों के अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों को छूता है।

एयर नाऊ स्पेशल

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