Friday, October 30, 2026

क़ानून-व्यवस्था के आधार पर नमाज़ियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश प्रशासन के उस आदेश को ख़ारिज कर दिया, जिसमें संभल ज़िले की एक मस्जिद में रमज़ान के दौरान नमाज़ अदा करने वाले लोगों की संख्या सीमित करने की बात कही गई थी. कानून विषयों से संबंधित वेवसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, अदालत ने कहा कि क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की ज़िम्मेदारी है.

आदेश में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने कहा कि अगर पुलिस अधीक्षक और ज़िला कलेक्टर को क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है और इसी वजह से वे नमाज़ियों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो उन्हें या तो इस्तीफ़ा दे देना चाहिए या फिर तबादला मांग लेना चाहिए.

अदालत ने कहा कि राज्य के वकील ने दलील दी थी कि संभावित क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ऐसा आदेश जारी किया गया था, लेकिन अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर स्थानीय प्रशासन यानी पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को लगता है कि वे क़ानून का राज लागू कराने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए या संभल से बाहर तबादला मांग लेना चाहिए.

लाइव लॉ के मुताबिक़, यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसे मुनज़िर ख़ान ने दायर किया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें रमज़ान के महीने में गाटा संख्या 291 पर नमाज़ अदा कराने से रोका जा रहा है, जहां उनके अनुसार एक मस्जिद मौजूद है. याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रशासन ने उस स्थान पर सिर्फ़ 20 लोगों को नमाज़ अदा करने की अनुमति दी थी, जबकि रमज़ान के दौरान वहां इससे कहीं अधिक नमाज़ियों के जुटने की उम्मीद थी.

एयर नाऊ स्पेशल

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