हजारीबाग: झारखंड में आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें चार दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी उनकी संपत्ति, बैंक लेनदेन और रिश्तेदारों से जुड़े आर्थिक मामलों की गहराई से जांच कर रही है। इस दौरान उनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और रिश्तेदारों के जरिए निवेश की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी इस मामले में मनी ट्रेल यानी पैसे के स्रोत और खर्च की पूरी जानकारी जुटा रही है। जांच में सामने आया है कि विनय चौबे की आय के मुकाबले काफी ज्यादा संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी ने उनके पूरे सेवा काल के आय और खर्च का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने करीब 2.20 करोड़ रुपये कमाए, जबकि उनके नियंत्रण वाले खातों में करीब 3.47 करोड़ रुपये आने के संकेत मिले। ACB की जांच में यह भी सामने आया कि उनकी आय से करीब 53 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने का शक है।
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परिजनों और सहयोगियों की भूमिका
इस मामले में ACB ने केवल विनय चौबे ही नहीं बल्कि उनके कई रिश्तेदारों और सहयोगियों को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी ने पत्नी, ससुर, साले और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी को शक है कि अवैध कमाई को शेल कंपनियों और अन्य माध्यमों से निवेश किया गया। इस नेटवर्क की जांच झारखंड के साथ अन्य राज्यों तक फैली हुई बताई जा रही है। विनय चौबे पहले से ही जमीन घोटाला और अन्य मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। हजारीबाग की खास महाल जमीन की अवैध खरीद-बिक्री मामले में भी उन्हें आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा झारखंड शराब घोटाले से जुड़े मामले में भी ACB ने उन्हें गिरफ्तार किया था और जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से भी जांच की थी।
ACB की जांच क्यों अहम मानी जा रही है
इस मामले को झारखंड में बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है। ACB लगातार छापेमारी, पूछताछ और दस्तावेजों की जांच कर रही है। ACB ने चौबे के चार्टर्ड अकाउंटेंट और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की है ताकि संपत्ति का पूरा नेटवर्क समझा जा सके। जांच एजेंसी पूछताछ के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी। अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। निलंबित IAS विनय चौबे का मामला झारखंड प्रशासन और राजनीति दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ACB की जांच से कई नए खुलासे हो सकते हैं।


