रांची : रांची के पूर्व उपायुक्त (डीसी) छवि रंजन को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। झारखंड सरकार ने उनका निलंबन आदेश रद्द कर दिया है। छवि रंजन का सस्पेंशन 14 अक्टूबर 2025 से खत्म किया गया है, उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। लैंड स्कैम केस में जेल से बाहर आने के बाद अब उन्हें जल्द ही नई पोस्टिंग मिलने की संभावना है।
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सुप्रीम कोर्ट से मिली थी जमानत
छवि रंजन को झारखंड लैंड स्कैम (भूमि घोटाला) से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई 2023 में गिरफ्तार किया था। ED का आरोप था कि उन्होंने रांची जिले में जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए सरकारी जमीनों को निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कराया गया था, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ। कई महीनों तक जेल में रहने के बाद, 14 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि वे जांच में सहयोग करेंगे और बिना अनुमति राज्य से बाहर नहीं जाएंगे।
राज्य सरकार ने हटाया निलंबन
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद छवि रंजन ने राज्य सरकार को आवेदन देकर अपना निलंबन समाप्त करने का अनुरोध किया था। इस पर विचार करते हुए झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि 14 अक्टूबर से निलंबन समाप्त माना जाएगा और उन्हें जल्द ही किसी विभाग में पोस्टिंग दी जाएगी।
कौन हैं छवि रंजन?
छवि रंजन 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने झारखंड के कई महत्वपूर्ण जिलों में पदस्थापना के दौरान कार्य किया है – पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में उप विकास आयुक्त, गुमला में उपायुक्त, और बाद में रांची के डीसी के रूप में नियुक्त रहे। रांची में कार्यकाल के दौरान ही उनके खिलाफ भूमि घोटाले से जुड़े आरोप सामने आए। आरोप है कि उन्होंने रांची के बारियातू, नामकुम और हटिया इलाके में कई विवादित जमीनों की खरीद-बिक्री में नियमों की अनदेखी की।
ED की कार्रवाई और गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल 2023 में छवि रंजन के रांची, जमशेदपुर और बिहार के गया स्थित घरों पर छापेमारी की थी। इन छापों में कई जमीनों के फर्जी दस्तावेज़, कैश और इलेक्ट्रॉनिक डेटा बरामद किए गए थे। पूछताछ के बाद 4 मई 2023 को उन्हें ED ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उन्हें PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) एक्ट के तहत जेल भेजा गया। रांची स्थित बिरसा मुंडा जेल में वे करीब 17 महीने तक बंद रहे।
मामला क्या था?
ED की जांच के अनुसार, रांची में कई जमीनें जो मूल रूप से आदिवासी या सरकारी भूमि थीं, उन्हें फर्जी कागजात बनवाकर अन्य लोगों के नाम कर दिया गया। इन जमीनों की कीमत करोड़ों रुपये बताई गई थी। ED ने दावा किया कि इस पूरे घोटाले में अधिकारियों, दलालों और जमीन कारोबारियों का गठजोड़ काम कर रहा था। छवि रंजन पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर इन ट्रांसफरों को मंजूरी दी। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि मैंने अपने कार्यकाल में सभी काम कानून के अनुसार किए। मुझे राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है।
अब आगे क्या?
निलंबन खत्म होने के बाद अब छवि रंजन को राज्य सरकार की ओर से नई पोस्टिंग मिलने की संभावना है। हालांकि, ED की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया निलंबन हटाना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। अदालत में मामला जारी रहेगा। अगर कोर्ट में दोष सिद्ध होता है, तो आगे की कार्रवाई तय होगी।
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छवि रंजन को मिली राहत ने झारखंड की प्रशासनिक हलचलों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जहाँ एक ओर उनका निलंबन हटना कानूनी और सेवा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इसे सत्तारूढ़ गठबंधन के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि राज्य सरकार उन्हें किस विभाग में नियुक्त करती है, और ED की आगे की जांच में क्या नया मोड़ आता है।


