बिहार : बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुशांत सिंह राजपूत का नाम चर्चा में है। इस बार वजह फिल्म या जांच नहीं, बल्कि उनकी ममेरी बहन दिव्या गौतम हैं। सूत्रों के अनुसार, दिव्या गौतम पटना की दीघा विधानसभा सीट से सीपीआई (एमएल) के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वह 15 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगी। सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद उनके परिवार का नाम कई बार सुर्खियों में आया, और अब जब उनकी बहन राजनीति में उतरने जा रही हैं, तो यह कदम काफी चर्चा में है।
क्यों चुना दीघा सीट और सीपीआई (एमएल) का रास्ता
दिव्या गौतम के करीबी बताते हैं कि उन्होंने दीघा सीट इसलिए चुनी क्योंकि यह इलाका सामाजिक और आर्थिक असमानता से जूझ रहा है। यहाँ गरीब और मजदूर लोगों की संख्या ज़्यादा है और दिव्या हमेशा से जन आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बड़े दलों से टिकट लेने की बजाय सीपीआई (एमएल) जैसे जमीनी संगठन का साथ इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगता है कि यह पार्टी सच में जनता की आवाज़ उठाती है, न कि केवल सत्ता की राजनीति करती है।
दिव्या का कहना है कि राजनीति उनके लिए सिर्फ चुनाव जीतने का जरिया नहीं, बल्कि न्याय और बदलाव की लड़ाई है, ठीक वैसे ही जैसे उनके भाई सुशांत सिंह राजपूत ने अपने जीवन में मेहनत और ईमानदारी से नाम कमाया था।
सुशांत सिंह राजपूत का नाम फिर चर्चा में
सुशांत सिंह राजपूत का नाम एक बार फिर बिहार के लोगों की जुबान पर है। लोग पूछ रहे हैं — क्या सुशांत अब बिहार का बेटा नहीं रहा?
2020 में जब सुशांत की मौत हुई थी, तब पूरा बिहार ही नहीं, पूरा देश न्याय की मांग कर रहा था। उस समय “बिहार का बेटा सुशांत” एक नारा बन गया था। हर राजनीतिक दलों ने भी उन्हें याद किया था, लेकिन वक्त बीतने के साथ-साथ मामला राजनीति में उलझकर रह गया।
क्या सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को न्याय मिला ?
सुशांत के परिवार ने शुरू से कहा था कि यह साधारण आत्महत्या नहीं, बल्कि साजिश है। मामला मुंबई से सीबीआई तक गया, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और ईडी (ED) ने भी जांच की।
लेकिन आज 2025 में, यह मामला पूरी तरह से शांत हो गया है। जांच का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। कई बार परिवार ने कहा कि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है।
सुशांत सिंह राजपूत की बहनें सोशल मीडिया पर अक्सर न्याय की मांग करती रहीं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
2020 चुनाव में सुशांत सिंह राजपूत मामला कैसे बना मुद्दा
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में सुशांत सिंह राजपूत की मौत सबसे बड़ा इमोशनल मुद्दा थी। हर पार्टी ने इसे अपने ढंग से उठाया।
आरजेडी और कांग्रेस ने कहा कि सरकार जांच में देरी कर रही है।
लोजपा के चिराग पासवान ने सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर पूरा प्रचार चलाया और कहा कि बिहार के युवाओं के साथ अन्याय हुआ है।
लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला धीरे-धीरे मीडिया और राजनीति से गायब हो गया।
रिया चक्रवर्ती का छुटना और सीबीआई जांच
2020 में रिया चक्रवर्ती को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में “मुख्य आरोपी” बताया गया था। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बहुत सारी बातें सामने आईं थीं। लेकिन कई सालों की जांच के बाद, रिया चक्रवर्ती को अदालत से राहत मिल गई। उन पर लगाए गए ज्यादातर आरोपों को अदालत ने खारिज कर दिया था ।
वहीं, सीबीआई जांच आज भी औपचारिक रूप से बंद नहीं हुई है, लेकिन कोई नई रिपोर्ट सामने नहीं आया है।
दिव्या गौतम की राजनीतिक शुरुआत का असर
दिव्या का राजनीति में उतरना सिर्फ एक चुनावी कदम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक भावनात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कई लोग कह रहे हैं कि यह सुशांत के न्याय की लड़ाई का अगला अध्याय हो सकता है। दिव्या खुद भी कहती हैं — “मैं सिर्फ राजनीति नहीं कर रही, मैं उस आवाज़ को ज़िंदा रखना चाहती हूं जो न्याय मांगते-मांगते थक चुकी है।”
न्याय और राजनीति
आज जब सुशांत सिंह राजपूत का मामला धीरे-धीरे भुलाया जा रहा है, तो दिव्या गौतम का राजनीति में उतरना फिर से उस चर्चा को जगा सकता है।
बिहार के लोग आज भी कहते हैं कि सुशांत सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बिहार की पहचान थे।
अब देखना यह है कि क्या दिव्या अपने भाई के नाम और उस अधूरे न्याय को लेकर लोगों के दिल में जगह बना पाएंगी या नहीं।
लेकिन इतना तय है कि सुशांत का नाम अब फिर से बिहार की राजनीति में गूंजने वाला है — इस बार उनकी बहन की आवाज़ के साथ।


