दिल्ली: राज्य सरकारों द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियमित नियुक्ति में देरी और लंबे समय तक कार्यवाहक DGP के भरोसे पुलिस व्यवस्था चलाने के चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इससे न केवल व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर के साथ भी अन्याय होता है।
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UPSC को मिले अधिकार
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस समस्या पर रोक लगाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को सशक्त किया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि UPSC समय रहते राज्यों को पत्र लिखकर DGP चयन के लिए अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव मांग सकता है। यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर प्रस्ताव भेजने में देरी करती है, तो UPSC सीधे सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले राज्यों के खिलाफ जवाबदेही तय होगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तेलंगाना सरकार की देरी बना मामला
यह मामला तेलंगाना सरकार द्वारा नियमित DGP की नियुक्ति में वर्षों तक की गई देरी से जुड़ा है। राज्य के अंतिम स्थायी DGP अनुराग शर्मा वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने लंबे समय तक UPSC को स्थायी DGP नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं भेजी। अप्रैल 2025 में आखिरकार प्रस्ताव भेजे गए, जिस पर UPSC ने आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस देरी के कारण 2017 के बाद DGP बनने के पात्र कई योग्य अधिकारी बिना इस पद पर पहुंचे ही सेवानिवृत्त हो गए।
प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देश दोहराए
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में तय दिशा-निर्देशों को दोहराया। अदालत ने कहा कि DGP की नियुक्ति एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, जिसमें UPSC द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन सबसे वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों के पैनल में से ही राज्य सरकार चयन करे। कोर्ट ने साफ कहा कि कई राज्य अपनी पसंद के अधिकारी को बनाए रखने के लिए एक्टिंग DGP का सहारा लेते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की मूल भावना के खिलाफ है।
प्रक्रिया में और देरी नहीं
हालांकि UPSC ने तेलंगाना सरकार की देरी पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया को और टालना गलत होगा, क्योंकि इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्यों को ही फायदा पहुंचता है। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर तेलंगाना में DGP चयन प्रक्रिया पूरी करे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पुलिस सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब कार्यवाहक DGP के सहारे लंबे समय तक पुलिस व्यवस्था चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का पालन हर हाल में करना होगा।


