Saturday, October 31, 2026

नीट छात्रा मामले में SIT को मिली साजिश की कड़ी, 25 के DNA रिपोर्ट से खुलेंगे कई राज

पटना: नीट की तैयारी कर रही नाबालिग छात्रा के रेप और मौत के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, मामला उतना ही गंभीर और जटिल होता जा रहा है। विशेष जांच टीम (SIT) अब इस घटना को किसी एक दिन या एक जगह की वारदात नहीं, बल्कि घटनाओं की पूरी श्रृंखला मानकर जांच कर रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि छात्रा के साथ क्या हुआ, कब हुआ और कहां हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है।

DNA जांच पर SIT का बड़ा फोकस

अब तक इस मामले में 25 लोगों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े लोग, हॉस्टल में आने-जाने वाले युवक, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने वाले लोग, परिजन और करीबी शामिल हैं। जांच के दायरे में हॉस्टल संचालक के बेटे का नाम भी सामने आया है, जिसका DNA सैंपल लिया गया है। FSL जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने के बाद DNA मिलान को केस का सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। सभी सैंपल जज की मौजूदगी में मेडिकल गाइडलाइन के तहत लेकर सील किए गए और फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। SIT का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा रेफरेंस सैंपल लेकर केस को कोर्ट में मजबूत और विवाद-मुक्त बनाया जाए। हालांकि, परिजनों ने DNA सैंपलिंग की संख्या को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई है।

11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रही SIT

SIT छात्रा की 27 दिसंबर से 6 जनवरी तक की 11 दिन की पूरी ट्रैवल हिस्ट्री की बारीकी से जांच कर रही है। पटना से जहानाबाद और फिर वापस पटना तक की हर मूवमेंट को मैप किया गया है। स्कॉर्पियो ड्राइवर, ऑटो चालक और ट्रेन की टाइमिंग तक की पुष्टि कर ली गई है।

डिजिटल सबूत बने जांच की रीढ़

डिजिटल जांच में मोबाइल टावर लोकेशन डेटा सबसे अहम साबित हो रहा है। खासकर 5 जनवरी की शाम से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक के समय को अलग-अलग स्लॉट में जांचा जा रहा है। इस डेटा को संदिग्धों के मोबाइल लोकेशन से मिलान किया जा रहा है, ताकि किसी संभावित कनेक्शन का पता चल सके। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), एक महीने की मोबाइल सर्च हिस्ट्री, गूगल लोकेशन डेटा और CCTV फुटेज सबको एक-एक कर जोड़ा जा रहा है।

नींद की गोली से जुड़ी सर्च ने बदली जांच की दिशा

छात्रा के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में नींद की गोली से जुड़े शब्द मिलने के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्रा पर किसी तरह का दबाव था या उसे कोई दवा दी गई थी। SIT ने 27 दिसंबर से 11 जनवरी तक की पूरी इवेंट सीक्वेंस तैयार कर ली है। इसमें हॉस्टल, अस्पताल, इलाज और छात्रा की तबीयत बिगड़ने से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ा गया है। AIIMS की टीम ने मामले में सीन रीक्रिएशन भी किया है, ताकि घटनाक्रम को वैज्ञानिक तरीके से समझा जा सके।

POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं

छात्रा के नाबालिग होने के कारण इस केस में POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। SIT का साफ कहना है कि यह मामला केवल सच्चाई सामने लाने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि कोई भी कड़ी छूट न जाए। क्योंकि जांच की हर छोटी-सी कड़ी ही अंत में न्याय की बुनियाद बनेगी। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

एयर नाऊ स्पेशल

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