देश : चुनाव आयोग ने मंगलवार से देश के 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस अभियान के तहत करीब 51 करोड़ मतदाताओं की वोटर लिस्ट की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य है, योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाए, फर्जी या दोहराए गए नाम हटाए जाएं और अवैध प्रवासियों की पहचान की जाए।
Highlights:
प्रक्रिया का समय और चरण
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक 4 दिसंबर 2025 तक चलेगी। इसके बाद 9 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, जिस पर लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे। सभी शिकायतों और सुधारों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने पहले ही 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक सभी राज्यों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच की जा सके।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR
इस बार SIR निम्नलिखित 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जा रहा है
- राज्य : उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, गोवा, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल।
- केंद्र शासित प्रदेश : अंडमान और निकोबार द्वीप, लक्षद्वीप और पुडुचेरी।
इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम में भी अगले साल चुनाव हैं, लेकिन वहां नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने के कारण SIR अलग से कराया जाएगा।
SIR का उद्देश्य
SIR का मकसद केवल नाम जोड़ना या हटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि :
- कोई योग्य मतदाता छूटे नहीं,
- कोई फर्जी या अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न रहे,
- और अवैध प्रवासियों के नाम लिस्ट से हटाए जाएं।
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत मंगलवार को हो चुकी है। यहां 2002 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर मौजूदा वोटर लिस्ट से मैपिंग और मैचिंग की जा रही है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 32.06 प्रतिशत नाम ही 2002 की सूची में मौजूद थे, यानी करीब 68% नाम नए जोड़े गए मतदाताओं के हैं।

SIR की तीन चरणों में प्रक्रिया
1. पहला चरण : गणना और सर्वेक्षण – BLO घर-घर जाकर मतदाताओं का विवरण एकत्र करेंगे और वोटर लिस्ट की जांच करेंगे।
2. दूसरा चरण : आपत्तियां और दावे – ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद लोग नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।
3. तीसरा चरण : अंतिम सत्यापन – सभी आपत्तियों और दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

पहचान के लिए जरूरी दस्तावेज
SIR के दौरान जब BLO घर-घर आएंगे, तो मतदाताओं को अपनी पहचान और पात्रता साबित करने के लिए निम्न 13 दस्तावेजों में से कोई एक दिखाना होगा – जन्म प्रमाण-पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, सरकारी जमीन या मकान के कागजात, जाति प्रमाण-पत्र, मूल निवास प्रमाण-पत्र, सरकारी नौकरी ID या पेंशन ऑर्डर, परिवार रजिस्टर की प्रति, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा जॉब कार्ड। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि यह नागरिकता या उम्र का प्रमाण नहीं है।
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राजनीतिक हलचल भी तेज
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर सियासत भी गर्म है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में SIR के खिलाफ मार्च निकालने का ऐलान किया है, वहीं भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने SIR के जरिए घुसपैठियों को बाहर निकालने की मांग पर जुलूस निकाला है। भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने दावा किया है कि इस बार करीब 1.20 करोड़ अवैध नाम वोटर लिस्ट से हट सकते हैं। वहीं, तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर SIR की वैधता को चुनौती दी है।
चुनाव आयोग का कहना है कि मार्च 2026 तक SIR की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि देश में साफ-सुथरी, सही और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार हो सके। इससे न सिर्फ लोकतंत्र मजबूत होगा, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।


