नई दिल्ली । ईडी ने सहारा समूह के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ओपी श्रीवास्तव को 1.79 लाख करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। उनके ऊपर निवेशकों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और शेल कंपनियों के जरिए फंड घुमाने का आरोप है। उन पर सुब्रत रॉय की मौत के बाद सहारा समूह की संपत्तियों की बिक्री में भी बड़ी भूमिका निभाने का संदेह है। पूरे मामले की जांच के दौरान 707 एकड़ भूमि की जब्ती के बाद श्रीवास्तव का नाम इस घोटाले में सामने आया था।
निवेशकों की रकम से बड़ी धोखाधड़ी का आरोप
ईडी के अनुसार श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने हजारों करोड़ रुपये का फंड गलत तरीके से ट्रांसफर करवाया और सहारा ग्रुप के नाम पर जुटाई गई रकम को गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल कराया। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी भूमिका उन लेनदेन में भी अहम थी, जिनमें बिना निवेशकों को जानकारी दिए पैसा दूसरी कंपनियों में खपाया गया।
सुब्रत रॉय की मृत्यु के बाद बढ़ी संदिग्ध गतिविधियां
ईडी को शक है कि सुब्रत रॉय की मौत के बाद सहारा समूह की संपत्तियों की बिक्री और प्रबंधन में भी ओपी श्रीवास्तव की एक बड़ी भूमिका रही। जांच रिपोर्ट के अनुसार कई जमीनों और संपत्तियों के सौदों में अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें श्रीवास्तव के हस्ताक्षर और निर्देशों का जिक्र है। इसी दौरान 707 एकड़ जमीन की जब्ती के बाद उनका नाम प्रमुखता से सामने आया।
सहारा जांच में नया मोड़, आगे क्या?
श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद ईडी अब उन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, जिनसे करोड़ों रुपये के लेनदेन जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम इस मामले में घिर सकते हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई उन लाखों निवेशकों के हित में है, जिनकी मेहनत की कमाई वर्षों से फंसी हुई है।



