नई दिल्ली: देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने ₹54,000 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी को देखते हुए केंद्र सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तैयार किए गए SOP को पूरे देश में तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अनजारिया की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए बैंकों की जवाबदेही पर कड़े सवाल खड़े किए ahi ।
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बैंकों को होना होगा सतर्क- SC
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरबीआई के माध्यम से देश के बैंकों को कहा कि वे जनता के पैसे के ट्रस्टी के रूप में अपनी जिम्मेदारी समझें। अदालत ने एक सीधा उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एक पेंशनभोगी सामान्यतः महीने में 10 से 20 हजार रुपये निकालता है, और अचानक उसके खाते से 50 लाख या 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर होने लगें, तो बैंकों के AI टूल्स अलर्ट क्यों नहीं जारी करते? बैंकों को ऐसी संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत रेड फ्लैग दिखाना चाहिए।
क्या है नया SOP और इससे आपको क्या फायदा होगा?
भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने कोर्ट को बताया कि RBI ने 2 जनवरी, 2026 को एक विशेष SOP तैयार किया है। जिसके तहत साइबर फ्रॉड का संदेह होने पर बैंक अस्थायी रूप से लेनदेन (डेबिट) को होल्ड कर सकेंगे। इससे पीड़ित का पैसा जालसाजों के हाथ लगने से पहले ही सुरक्षित किया जा सकेगा। वहीं गृह मंत्रालय इस SOP को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करेगा ताकि पुलिस, बैंक और जांच एजेंसियों के बीच रियल-टाइम तालमेल हो सके। जिससे इस तरह बड़े पैमाने पर है रही धोखाधड़ी से आम जनता प्रभावित न हो। इसके साथ ही कोर्ट ने RBI और दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया है कि वे डिजिटल फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए मुआवजा देने का एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क तैयार करें। जिससे ठगी के शिकार हुए पीड़ितों को मुआवजा मिल सके। साथ ही डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान करने और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स का पर्दाफाश करने की जिम्मेदारी CBI को सौंपी गई है। ताकि आने वाले समय में देश में इस तरह की धोखाधड़ी और ठगी के मामलों में रोकथाम हो।
राज्यों के बजट से बड़ी है ठगी की रकम
न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची ने गृह मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई कि अप्रैल 2021 से अब तक साइबर फ्रॉड के जरिए ठगी गई राशि कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कई मामलों में बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत भी सामने आई है, जिस पर अब नकेल कसी जाएगी।
अगला कदम क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह RBI और दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर अगले 4 सप्ताह के भीतर एक विस्तृत एमओयू तैयार करे। इसके साथ ही, बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लेनदेन को पकड़ने के लिए अपनी तकनीक और AI सिस्टम को तुरंत अपडेट करें।
सावधान रहें: अगर आप किसी भी तरह के डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।


