रांची : केंद्रीय सरना समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष सरहुल पर्व पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाएगा। पर्व के दौरान डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और शोभायात्रा में मांदर-ढोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का ही उपयोग किया जाएगा। मंगलवार को सिरमटोली में आयोजित इस अहम बैठक में समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया।
Highlights:
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सरहुल आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व है, जिसकी मूल पहचान और परंपरा को बनाए रखना आवश्यक है। इस मौके पर लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि अधिक से अधिक लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हों। साथ ही झांकियों के माध्यम से आदिवासी इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करने का भी आह्वान किया गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरहुल में डीजे का उपयोग नहीं होगा और मांदर-ढोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
डीजे प्रतिबंध पर सियासत तेज
झारखंड में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उच्च न्यायालय के 16 जुलाई 2024 के आदेश के तहत राज्यभर में डीजे और तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इधर भाजपा के कई विधायकों ने आरोप लगाया है कि रामनवमी जैसे धार्मिक पर्वों पर डीजे बजाने पर रोक लगाकर हिंदुओं की आस्था को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि पर्व-त्योहारों में पारंपरिक उत्साह को सीमित किया जा रहा है।
हालांकि, दिलचस्प पहलू यह है कि जिन भाजपा विधायकों द्वारा झारखंड में डीजे बजाने की मांग उठाई जा रही है, उनके ही दल की सरकार वाले कई राज्यों में भी डीजे के उपयोग पर सख्त नियम लागू हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत डीजे के उपयोग को नियंत्रित किया गया है।

