रांची: झारखंड में इंजीनियरिंग परीक्षा से जुड़े विवाद ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की प्रारंभिक जांच के दौरान घूस मांगे जाने के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है। यह जांच झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू की गई है, जिसमें झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई CBI की जांच
यह मामला धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया था। हाईकोर्ट के निर्देश के आलोक में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए AICTE द्वारा दी गई नामांकन अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसके साथ ही AICTE और कॉलेज के बीच हुए पत्राचार को भी खंगाला गया।
परीक्षा विवाद से जुड़े दस्तावेजों की जांच
सीबीआई अधिकारियों ने कॉलेज और JUT के बीच परीक्षा में शामिल होने की अनुमति को लेकर उत्पन्न विवाद से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों से पूछताछ की गई। जांच के क्रम में यह संकेत मिले हैं कि कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से घूस मांगी गई, हालांकि सीबीआई ने अभी इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। गौरतलब है कि JUT द्वारा परीक्षा में शामिल होने की अनुमति न देने के फैसले को चुनौती देते हुए धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने पहले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ बताया था।
नो एंट्री बोर्ड हटाकर वसूली जैसा मामला: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह मामला ट्रैफिक पुलिस द्वारा नो एंट्री का बोर्ड हटाकर अवैध वसूली करने जैसा प्रतीत होता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब AICTE ने कॉलेज को नामांकन की अनुमति दे दी है, तो JUT द्वारा परीक्षा में शामिल होने से रोकना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। AICTE से मान्यता मिलने के बावजूद JUT द्वारा परीक्षा में शामिल होने की अनुमति न दिए जाने से सैकड़ों छात्रों का भविष्य संकट में आ गया है। कॉलेज का आरोप है कि प्रशासनिक टालमटोल और कथित भ्रष्टाचार के कारण छात्रों को परीक्षा से वंचित किया जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबकी नजर सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो जल्द ही हाईकोर्ट में दाखिल की जानी है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।


