न्यूज डेस्क : अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर एक बार फिर नई हलचल देखने को मिल रही है। दिलचस्प बात यह है कि जिस वेनेजुएला से तेल खरीदने पर अमेरिका ने पिछले साल भारत पर टैरिफ लगाया था, अब वही अमेरिका भारत से वेनेजुएला का तेल दोबारा खरीदने की वकालत कर रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि अमेरिका भारत को रूस से तेल खरीदने का एक वैकल्पिक रास्ता देना चाहता है।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह रूसी कच्चे तेल के आयात को कम करने में मदद कर सकता है। इसके बदले भारत वेनेजुएला से तेल की खरीद फिर से शुरू कर सकता है। अमेरिका का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा जरूरतें भी पूरी होंगी और रूस पर निर्भरता भी घटेगी। अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती करने का भरोसा दिया है। अमेरिका पहले भी कई बार दावा कर चुका है कि आने वाले महीनों में भारत रूस से तेल का आयात रोजाना कई लाख बैरल तक कम कर सकता है।
भारत और अमेरिका के व्यापार में समझौता
भारत ने जनवरी महीने में रूस से करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा था। फरवरी में इसके घटकर लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन और मार्च में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। आगे चलकर यह आयात और घटकर 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक आ सकता है। माना जा रहा है कि ऐसा करने से भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को गति मिल सकती है।
रूस से तेल खरीद में कमी के बीच अमेरिका, वेनेजुएला को एक वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर अपना प्रभाव मानते हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2 और 3 जनवरी की दरमियानी रात अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर अपना अधिकार जता रहा है।


