Tuesday, July 21, 2026

Prashant Kishor का बड़ा आरोप सम्राट चौधरी हत्या केस में आरोपी, Samrat Chaudhary देंगे इस्तीफ़ा?

बिहार : बिहार की सियासत का तापमान एकदम हाई है । वजह हैं जनसुराज के संस्थापक और खुद को जनता का प्लानर कहने वाले प्रशांत किशोर। पीके ने फिर से बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप ठोक दिए हैं। और आरोप भी ऐसे-वैसे नहीं, हत्या जैसे संगीन मामलों से जुड़े हुए। पीके ने कैमरे के सामने साफ-साफ कहा कि सम्राट चौधरी पर छह लोगों की हत्या का आरोप है। यह सिर्फ आरोप ही नहीं, बल्कि केस भी हुआ। बात 1998 की है। उस समय कांग्रेस के बड़े नेता सदानंद सिंह की हत्या बम से कर दी गई थी। आरोप लगा कि इस घटना में सम्राट चौधरी भी शामिल थे। बम मारकर सदानंद सिंह समेत छह लोगों की जान ले ली गई थी। और फिर सम्राट चौधरी जेल गए। लेकिन, कुछ महीनों के भीतर ही नाबालिग होने के आधार पर उन्हें राहत मिल गई। अदालत ने बरी नहीं किया, बस नाबालिग मानकर जेल से बाहर कर दिया।

 सम्राट चौधरी पर छह हत्याओं का केस दर्ज 

प्रशांत किशोर का कहना है कि यही व्यक्ति आज बिहार के डिप्टी सीएम बने बैठे हैं। जनता को यह जानने का हक है कि उनका उपमुख्यमंत्री मर्डर केस का अभियुक्त रह चुका है। पीके कहते हैं कि जब वह जेल से बाहर आए, राजनीति में लौटे, तब पहली बार मंत्री बनने के बाद उनपर उम्र घोटाले का केस भी हुआ। इस विवाद में उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। यानी आरोपों की लंबी फेहरिस्त है।

शिल्पी गौतम हत्याकांड में भी नाम आने का दावा

शिल्पी गौतम हत्याकांड। यह मामला उस समय पूरे बिहार में सुर्खियों में था। जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर का दावा है कि इसी केस में सम्राट चौधरी संदिग्ध अभियुक्त बनाए गए थे। उस वक्त वे आरजेडी में थे और साधु यादव के साथ उनका नाम आया। केस सीबीआई तक गया। सीबीआई ने सम्राट चौधरी से पूछताछ की, उनका सैंपल लिया। लेकिन उस समय लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। पीके का आरोप है कि साधु यादव को बचाने के चक्कर में पूरा केस दबा दिया गया और बंद कर दिया गया। पीके ने जनता के सामने यह भी चुनौती रखी कि सम्राट चौधरी खुद बताएं कि उनका नाम शिल्पी गौतम केस में आया था या नहीं। सीबीआई ने उनसे पूछताछ की थी या नहीं। अगर वह यह स्पष्ट नहीं करेंगे तो वह खुद अगली बार सीबीआई की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक कर देंगे।

पीएम मोदी और सीएम नीतीश से इस्तीफे की मांग

यहां पर पीके ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि अगर डिप्टी सीएम पर हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं तो या तो उन्हें गिरफ्तार कीजिए, या फिर उन लोगों को जेल से बाहर कीजिए जिनपर यही आरोप हैं। आखिर एक के लिए कानून अलग और दूसरे के लिए अलग क्यों? पीके ने साफ कहा कि जिस इंसान पर इतनी हत्याओं का आरोप हो, वह डिप्टी सीएम बना हुआ है। पीएम मोदी और सीएम नीतीश को तुरंत उनसे इस्तीफा लेना चाहिए।अब सोचिए, बिहार की राजनीति में यह आरोप कोई छोटा-मोटा धमाका नहीं है। एक तरफ सत्ता में बैठा नेता है जो डिप्टी सीएम की कुर्सी पर है, और दूसरी तरफ पीके जैसे चुनावी रणनीतिकार से नेता बने व्यक्ति हैं, जो हर दिन जनसभा में यही सवाल उठा रहे हैं। यह भी ध्यान दीजिए कि यह वही सम्राट चौधरी हैं जिनके बारे में पीके दावा करते हैं कि उनका असली नाम सम्राट कुमार मौर्य था। यानी पहचान और उम्र दोनों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

तो कहानी साफ है कि बिहार की राजनीति का नया रंगमंच सज चुका है। एक तरफ नीतीश कुमार और बीजेपी का गठबंधन है, जिसके डिप्टी सीएम हैं सम्राट चौधरी। दूसरी तरफ है प्रशांत किशोर, जो हर सभा में सम्राट पर वार करते हैं। आरोप लगाते हैं कि सत्ता बचाने के लिए नेताओं का पूरा नेटवर्क एक-दूसरे को बचाता रहा है।
अब सवाल यही है कि जनता किस पर भरोसा करे। क्या पीके के आरोप महज सियासी हथियार हैं या फिर वाकई सम्राट चौधरी का पुराना इतिहास उतना ही संगीन है जितना बताया जा रहा है? जवाब कोर्ट और इतिहास दोनों के पास है। लेकिन आज के लिए इतना समझ लीजिए कि बिहार का चुनावी मैदान गर्म है और आरोप-प्रत्यारोप की यह आग अभी और भड़कने वाली है।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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