Thursday, July 23, 2026

झारखंड में 7 साल तक खुद को IAS बताने वाले व्यक्ति को पुलिस ने किया गिरफ्तार

झारखंड : पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने लगभग 7 साल तक खुद को आईएएस अधिकारी (Indian Administrative Service) के रूप में पेश किया, हालांकि वह UPSC परीक्षा चार बार देने के बावजुद भी परीक्षा में सफल नहीं हो पाया। आरोपी का नाम राजेश कुमार (35) बताया जा रहा है और वह पलामू के हुसैनाबाद क्षेत्र का निवासी है। पुलिस ने उसके खिलाफ बड़ी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं।

क्या है पूरा मामला 

यह पूरा मामला 2 जनवरी 2026 को तब सामने आया जब राजेश खुद हुसैनाबाद पुलिस स्टेशन गया। उसने पुलिस से अपनी रिश्तेदार से जुड़े जमीन विवाद में मदद मांगी और अपने आपको 2014 बैच के ओडिशा-कैडर IAS अधिकारी के रूप में बताया। उसे पुलिस स्टेशन में आते-आते अपने सरकारी रुतबे और अनुभव की जानकारी देने में कोई हिचकिचाहट नहीं थी। लेकिन बात जब पुलिस से आगे बढ़ी, तो अधिकारियों को उसके विवरण में कई विरोधाभास नजर आए। उसने अपने पद, पोस्टिंग और सेवाकाल के बारे में अलग-अलग बातें कही, जिनसे पुलिस को शक हुआ। जांच के बाद पता चला कि राजेश का नाम किसी सरकारी अधिकारी की सूची में नहीं था। पुलिस ने तुरंत उसकी पहचान की पुष्टि की और उसे हिरासत में लिया।

राजेश ने कब से यह झूठ बोला?

पूछताछ में राजेश ने बताया कि उसने UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा चार बार दी थी, जिसमें वह सिर्फ प्रारंभिक (प्रिलिम्स) परीक्षा पास कर पाया, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाया। अपनी अभिभावकों की उम्मीदों पर खरा उतरने और आईएएस बनने का सपना सच करने के लिए उसने यह धोखाधड़ी शुरू की। उसने अपने परिवार, पड़ोसियों और सरकारी अधिकारियों को यह विश्वास दिलाया कि वह अधिकारी है।

आरोपी के पास क्या मिला?

पुलिस ने तलाशी के दौरान राजेश के पास से फर्जी पहचान पत्र, सरकारी विभाग जैसा बोर्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। उसने अपनी गाड़ी पर भी Government of India, Department of Telecommunications लिखा हुआ बोर्ड लगाया था, जिससे लोगों को लगता था कि वह किसी बड़े सरकारी पद पर है। राजेश के खिलाफ भ्रामक दस्तावेजों का उपयोग, सरकारी पद का गलत दावा और अफसरों तथा आम लोगों को गुमराह करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है।

क्यों है यह मामला खास?

यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि किसी व्यक्ति ने इतने लंबे समय तक खुद को सरकारी अधिकारी साबित किया और लोगों को प्रभावित किया। कई सरकारी कार्यालयों, थानों और स्थानीय अधिकारियों के सामने उसने बिना कोई सत्य पहचान के अपने आपको अधिकारी बताया था। यह पुलिस की सतर्कता और पहचान जांच के महत्व को भी उजागर करता है।  पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पहले भी कुछ व्यक्ति पहचान छुपा कर खुद को सरकारी अधिकारी बताते रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में वे लंबे समय तक पकड़े नहीं गए। इस बार पुलिस को शक तब हुआ जब आरोपी अपने अनुभव और सेवाकाल के बारे में लगातार विरोधाभासी बातें कहने लगा। पुलिस ने कहा कि इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों में जांच जारी रहेगी और ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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