Thursday, July 23, 2026

पीएम मोदी अयोध्या स्थित राम मंदिर पर आज करेंगे धर्मध्वजारोहण

अयोध्या: धार्मिक नगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक पल की तैयारी में है। मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर दोपहर लगभग 12 बजे के अभिजीत मुहूर्त में केसरिया (भगवा) धर्म ध्वजा फहराएंगे। यह समारोह मंदिर के निर्माण को आधिकारिक रूप से पूरा होने का प्रतीक माना जा रहा है। यह मुहूर्त इसलिए चुना गया है क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार अभिजीत समय सूर्य की ऊर्जा से जुड़ा होता है और धार्मिक तौर पर बहुत शुभ माना जाता है।

आयोजन की रूपरेखा और महत्त्व

प्रधानमंत्री मोदी ध्वजारोहण के बाद मंदिर के राम दरबार में पूजा-अर्चना करेंगे और रामलला के गर्भगृह का दर्शन करेंगे। ध्वजा फहराने का समय लगभग दोपहर 12 से 12:30 बजे के बीच होगा। यह तिथि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी है, जो पारंपरिक रूप से श्रीराम और माता सीता के विवाह पचमी से मेल खाती है। उसी दिन सिख गुरु तेग बहादुर जी का वलिदान दिवस भी है, जिससे दिन की आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।

सुरक्षा एवं सजावट

अयोध्या शहर में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। 2.5 किलोमीटर के रोड शो मार्ग को बंद कर दिया गया है। मंदिर और आसपास का क्षेत्र फूलों से भारी सजावट किया गया है। सामने की ओर मंदिर को लगभग 100 क्विंटल फूल से सजाया गया है, जबकि अयोध्या शहर में कुल मिलाकर करीब 300 क्विंटल फूल का उपयोग हुआ है। लगभग 1,600 सीसीटीवी कैमरे मंदिर परिसर और आने-जाने वाले लोगों पर निगरानी रखेंगे। इस धार्मिक आयोजन में करीब 21,000 अतिथि आमंत्रित किए गए हैं। अतिथियों में बड़े-बड़े संत-समाज के लोग, धार्मिक और सामाजिक हस्तियाँ शामिल हैं। सुरक्षा को देखते हुए लगभग 7,000 विशेष सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

ध्वजा का प्रतीक और डिजाइन

ध्वज की लंबाई लगभग 20 फीट, ऊँचाई लगभग 10 फीट है और यह एक त्रिकोणाकार डिजाइन में है। ध्वज केसरिया रंग का है, जिसमें स्वर्ण निम्बण्य धागे से हाथ-लेगा हुआ है। इसमें तीन बड़े प्रतीक अंकित हैं : सूर्य चिह्न जो की श्रीराम के सूर्य वंश का प्रतीक है, ॐ आध्यात्मिक चेतना का प्रतिनिधित्व है। कोविदार वृक्ष जो की रामायण में वर्णित पवित्र वृक्ष है। ध्वज बनाने के लिए पैराशूट-ग्रेड नायलॉन और रेशम का उपयोग किया गया है, जिससे यह तेज हवाओं (कहा जा रहा है तकरीबन 200 किमी/घंटा) को भी सह सकता है। ध्वजको एक 42 फीट ऊँचे ध्वज-दंड पर लगाया गया है, जो 360-डिग्री घूमने में सक्षम है और गेंदीय बेयरिंग पर टिका हुआ है।

आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

यह ध्वजारोहण समारोह मंदिर के निर्माण के आधिकारिक पूर्णता का प्रतीक माना जा रहा है। आयोजन एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देता है। क्योंकि ध्वज में राम के आदर्श, रामराज्य और भारतीय संस्कृति की झलक है। इस दिन शहर में भक्ति-भाव की लहर है – रामधुन, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बीच अयोध्या पूरा उल्लास और श्रद्धा से जगमगा रहा है। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता और ऐतिहासिक प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर