झारखंड हाईकोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत, 8 और 9 मई को 2819 अभ्यर्थी माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में होंगे शामिल

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद मामले में अहम सुनवाई करते हुए पेपर-2 की पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी सहित सभी 2819 अभ्यर्थी चाहें तो 8 और 9 मई को होने वाली पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका कहना था कि बिना दोषी अभ्यर्थियों की पहचान किए सभी 2819 उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना गलत है। हालांकि अदालत ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से मना कर दिया और अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी।

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जेएसएससी ने बताई पुनर्परीक्षा की वजह

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से अदालत को बताया गया कि यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी और इसमें करीब 24 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। आयोग ने कहा कि जांच के दौरान 2819 अभ्यर्थियों के आईपी एड्रेस में हैकिंग और तकनीकी अनियमितता पाई गई थी। इसी कारण इन अभ्यर्थियों के लिए 8 और 9 मई को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। आयोग की ओर से सभी संबंधित उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और जेएसएससी को निर्देश दिया कि इस भर्ती परीक्षा का परिणाम जून 2026 तक जारी किया जाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

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मॉडल आंसर को लेकर भी दायर की गई याचिका

इस मामले में अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिका में जेएसएससी को मॉडल आंसर सार्वजनिक करने और उस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर देने की मांग की गई है। बाद में संशोधन याचिका दाखिल कर 23 अप्रैल 2026 को जारी जेएसएससी के नोटिस को भी चुनौती दी गई, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि सभी अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के दायरे में लाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना था कि कई उम्मीदवार किसी भी तरह की गड़बड़ी में शामिल नहीं थे, फिर भी उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। प्रार्थियों ने मांग की कि आयोग पहले संबंधित परीक्षा केंद्रों और दोषी व्यक्तियों की पहचान करे और उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई करे।

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