बाबूलाल मरांडी ने CCTV टेंडर में घोटाले का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

रांची: झारखंड भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के सभी थानों में CCTV कैमरा लगाने की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका जताई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक विस्तृत पत्र लिखकर निविदा प्रक्रिया पर सवाल  उठाए हैं और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। मरांडी ने आरोप लगाया है कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के तहत थानों में CCTV लगाने के लिए निकाली गई निविदा को पहले रद्द किया गया और अब नई निविदा के जरिए कुछ खास कंपनियों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

कुछ खास संस्थानों को फायदा 

अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि नई निविदा की शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं कि इसका लाभ केवल चुनिंदा कंपनियों को मिले। उन्होंने टाटा एडवांस सिस्टम का नाम लेते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों और सिंडिकेट के जरिए टेंडर को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में पदस्थ अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। मरांडी ने अपने पत्र में संयुक्त सचिव, सूचना तकनीकी विभाग के एक पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि JAPIT के सीईओ पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले को संदिग्ध बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ निविदा रद्द कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें शामिल अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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संविदा कर्मियों को धमकाने का आरोप 

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर फाइल आगे बढ़वाई गई। मरांडी के अनुसार, पहले जहां कर्मचारियों को दो साल तक का सेवा विस्तार दिया जाता था, वहीं इस बार केवल छह महीने का विस्तार दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को यह चेतावनी दी गई है कि अगर किसी ने इस प्रक्रिया का विरोध किया तो उसका सेवा विस्तार नहीं किया जाएगा।

टेंडर की तकनीकी शर्तों पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने निविदा की कई तकनीकी शर्तों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें इस प्रकार बनाई गई हैं कि केवल कुछ विशेष कंपनियां ही इसमें पात्र हो सकें। उन्होंने मुख्य रूप से CCTV रिकॉर्डिंग अवधि और कैमरा रेजोल्यूशन में विरोधाभास, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अनुभव की अनावश्यक शर्त, CCTV औ।र NVR उपकरणों के लिए सीमित कंपनियों को पात्र बनाना और तो और UPS और अन्य उपकरणों के लिए असामान्य अनुभव और टर्नओवर शर्तें पर आपत्ति जताई है।

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शराब घोटाले का भी किया जिक्र

मरांडी का आरोप है कि पूरी निविदा प्रक्रिया कुछ विशेष OEM और कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई प्रतीत होती है। पत्र में बाबूलाल मरांडी ने राज्य के चर्चित शराब घोटाले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले भी उन्होंने सरकार को संभावित घोटाले को लेकर आगाह किया था, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि CCTV परियोजना में संभावित भ्रष्टाचार को देखते हुए तत्काल निविदा रद्द की जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले पर राज्य सरकार या सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बाबूलाल मरांडी के इस पत्र के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

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