Thursday, July 23, 2026

बिहार चुनाव से पहले नीतीश कुमार के बेटे निशांत गायब! अचानक सार्वजनिक मंचों से दुरी ने बढ़ाई सियासी हलचल

बिहार  बिहार विधानसभा चुनाव होने में अब कुछ ही दिन बाकी है, ऐसे में अलग अलग पार्टीज के लोग अपने अपने प्रचार प्रसार में जुट गये है. बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने सबसे पहले मुज्ज़फरपुर और गोपालगंज में अपनी चुनावी प्रचार किया वही गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और पीएम मोदी 24 अक्टूबर को बिहार आकर चुनावी प्रचार करना शुरू करेंगे.

नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रहस्यमय ढंग से गायब

नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार कुछ महीनों से सामने नज़र नहीं आ रहे है. ये बड़ी सोचने वाली बात है की निशांत कुमार जो अपने पिता का कभी समर्थन करते नजर आ रहे थे वो अचानक ऐसा क्या हुआ जो वो एक दम से गायब हो गए। बीते कुछ दिनों से वह सार्वजनिक मंचों से अचानक ही दूरी बना ली है. साथ ही बिहार चुनाव के ऐलान के बाद निशांत कुमार की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. पिछले कुछ महीने पहले तेजस्वी यादव के आरोपों पर करारा जवाब देने वाले और पिता के स्वास्थ्य व राजनीति पर मजबूती से बयान देने वाले निशांत अब उनका नज़र ना आना कई कारणों को दर्शाता है. सबसे बड़ा कारण नीतीश कुमार की पारंपरिक परिवार को राजनीति से दूर रखने की, इस रणनीति के चलते ही निशांत ने चुनाव से दूरी बनाई है या फिर माजरा कुछ और है.

राजनीति से दूरी या रणनीति

निशांत ने अक्सर खुद को राजनीति से दूर बताते हुए भी जरूरत पड़ने पर पिता के समर्थन में मोर्चा संभाला था. जब तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के स्वास्थ्य खासकर मानसिक क्षमता पर सवाल उठाए थे, तब निशांत ने मजबूती से जवाब दिया था कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं और तेजस्वी को राजनीतिक बयानबाजी से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. जब मीडिया में उन्हें नीतीश कुमार का राजनीतिक उत्तराधिकारी बताया जाने लगा, तब निशांत ने स्पष्ट किया था कि उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वह अपने पिता को ही बार- बार मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. हालांकि, उनके इस बयान को भी सियासी समझ का संकेत माना गया था ।

एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गठबंधन अब अपने उम्मीदवारों की सूचियां जारी कर चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है. लेकिन इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच एक चेहरा जो पिछले कुछ महीनों से खूब चर्चा में था, वह पूरी तरह से गायब हो गया है. चुनावी घोषणा से पहले तक निशांत कुमार ने राजनीतिक बयानों से खासी सुर्खियां बटोरी थीं. वह न केवल अपने पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे थे, बल्कि जेडीयू और नीतीश कुमार पर होने वाले हमलों का करारा जवाब देने वाले पिलर के रूप में भी सामने आए थे. लेकिन चुनाव के ऐलान के बाद से निशांत न तो किसी चुनावी मंच पर दिखे हैं और न ही उनका कोई सार्वजनिक बयान सामने आया है.

JDU में उत्तराधिकारी को लेकर संशय बरकरार

दरअसल नीतीश की पार्टी में दूसरे नंबर पर कोई नेता टिक नहीं पाता है, इसलिए पार्टी में नीतीश के बाद अगला चेहरा कौन होगा इसकी तस्वीर कभी भी स्पष्ट नहीं रही है. जेडीयू में कई ऐसे नेता रहे जो नीतीश के काफ़ी क़रीबी माने जाते थे लेकिन कुछ ही दिनों में नीतीश से उनकी केमिस्ट्री बिगड़ी हुई दिखी. उदहारण के तौर पर मौजूदा समय में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा भी कुछ साल पहले तक नीतीश की पार्टी में ही थे और उनके काफ़ी क़रीब माने जाते थे, लेकिन फिर अपनी अलग पार्टी बना ली थी.

तेजस्वी यादव से जुड़ा विवाद बना था सुर्खियों का कारण

एक कारण ये भी हो सकता है निशांत कुमार को राजनीती में ना लाने का, जब नितीश कुमार के बेटे तेजस्वी को अपने पिता के स्वास्थ्य के लिए करारा जवाब दिया था, उस समय पूरा लालू परिवार नितीश कुमार पर टूट पड़ा था. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी कहा था कि नीतीश कुमार से बिहार नहीं संभल रहा है तो वो अपने बेटे को ले आएं, वही बिहार चलाएंगे. हालांकि जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने राबड़ी देवी को जवाब देते हुए कहा था की राबड़ी देवी को अपने बेटे तेज प्रताप की ज़्यादा चिंता करनी चाहिए. निशांत की लोकप्रियता और उनके बयान को बिहार की सियासत में मास्टरस्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है. हालांकि राजनीति में आने का फ़ैसला वो ख़ुद करेंगे या नीतीश कुमार करेंगे.

इंजीनियर से सियासत के केंद्र में पहुंचे निशांत

निशांत कुमार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं. वे हमेशा राजनीति से दूरी बनाए रखते आए हैं और साधारण, निजी जीवन जीते हैं. पेशे से इंजीनियर, निशांत कभी सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय नहीं दिखे. खुद नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि ‘ निशांत राजनीति में नहीं आना चाहते.’ लेकिन जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है. एक वर्ग ऐसा है जो मानता है कि निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाकर पार्टी को एक नया चेहरा दिया जा सकता है, जिससे नीतीश कुमार की विश्वसनीयता और पारिवारिक विरासत दोनों का फायदा मिलेगा. वहीं, दूसरा वर्ग इस विचार से सहमत नहीं है और मानता है कि निशांत की गैर- राजनीतिक पृष्ठभूमि उन्हें सीधे चुनावी अखाड़े में उतारने के लिए पर्याप्त नहीं है. और यही मुख्य कारण है की निशांत कुमार अचानक राजनीती से गायब हो गये.

 

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