Friday, June 19, 2026

खूंटी में नाबालिग की पुलिस हिरासत में पिटाई मामले में NHRC का सख्त रुख, मुआवजा और FIR के आदेश

रांची: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने झारखंड के खूंटी जिले में एक नाबालिग लड़के के साथ पुलिस हिरासत में हुई कथित मारपीट के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने झारखंड सरकार को पीड़ित बच्चे शिवा कुमार सिंह को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारी और मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अंतिम अल्टीमेटम भी दिया गया है। आयोग ने साफ कहा है कि इस मामले में नाबालिग के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 16 फरवरी 2025 का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार खूंटी पुलिस मानव तस्करी के एक संदिग्ध आरोपी की तलाश में कोसंबी गांव पहुंची थी। जब आरोपी घर पर नहीं मिला तो पुलिस ने कथित तौर पर घर में तोड़फोड़ की। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने आरोपी के 16 वर्षीय बेटे शिवा कुमार सिंह को जबरन अपने साथ ले लिया और उसे खूंटी महिला थाना ले जाया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि महिला थाना में सब-इंस्पेक्टर संतोष रजक ने बच्चे की बेरहमी से पिटाई की। मारपीट इतनी गंभीर थी कि बच्चा ठीक से चलने, बैठने और उठने की हालत में नहीं रहा। बताया गया कि पुलिस बच्चे से उसके पिता के ठिकाने की जानकारी हासिल करना चाहती थी और इसी दबाव में उससे मारपीट की गई।

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NHRC ने बताया कानून का उल्लंघन 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी नाबालिग बच्चे को थाने लाना और उसके साथ हिंसा करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने कहा कि जिस बच्चे का मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था, उसके साथ इस तरह का व्यवहार उसके जीवन और गरिमा के अधिकार का हनन है। आयोग ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारी का यह कदम मानवाधिकारों के खिलाफ है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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सरकार ने मुआवजे को दी मंजूरी

झारखंड सरकार ने आयोग को जानकारी दी है कि पीड़ित बच्चे को एक लाख रुपये मुआवजा देने की मंजूरी दे दी गई है। यह राशि जल्द ही परिवार को सौंप दी जाएगी। हालांकि आयोग ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अब तक आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। मामले के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाबालिग बच्चों के साथ इस तरह की हिंसा कानून और मानवता दोनों के खिलाफ है।

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