न्यूज डेस्क: भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार अदालत ने भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना है। कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है।
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फैसले के बाद धार में हाई अलर्ट
अदालत के फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने पूरे शहर को छावनी में बदल दिया है। संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ समेत करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। शहर के प्रमुख इलाकों और भोजशाला परिसर के आसपास पुलिस की विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
ASI की रिपोर्ट को अदालत ने माना अहम
इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अदालत में 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। अदालत ने इस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना, जबकि मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। ASI ने 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद यह रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में खुदाई के दौरान मूर्तियां, सिक्के और कई ऐतिहासिक अवशेष मिलने की बात कही गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार परिसर में परमारकालीन भवन की नींव पर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे के दौरान मिले स्तंभों और वास्तुकला से यह संकेत मिला कि ये पहले मंदिर का हिस्सा रहे होंगे, जिनका बाद में मस्जिद निर्माण में इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि परिसर में कुल 188 स्तंभ मिले, जिनमें 106 खड़े और 82 आड़े स्तंभ शामिल हैं। ASI के अनुसार इन स्तंभों की बनावट मंदिर स्थापत्य शैली को दर्शाती है। ASI रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि स्तंभों पर बनी देवी-देवताओं और मानव आकृतियों को बाद में औजारों से क्षतिग्रस्त किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिसर में मिले कई अवशेष प्राचीन हिंदू मंदिर से जुड़े प्रतीत होते हैं।


