Thursday, October 29, 2026

पश्चिम बंगाल में ईडी की रेड के खिलाफ टीएमसी का दिल्ली से लेकर कोलकाता तक प्रदर्शन, ममता बनर्जी भी शामिल

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासत एक बार फिर गरमा गई है, जहां केंद्र और राज्य सरकार के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है. और ये प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई के वजह से हुआ है, केंद्रीय एजेंसी ने बीते दिन तड़के सुबह तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल हेड और आई-पैक प्रमुख के ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी की इस सक्रियता को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए टीएमसी ने मोर्चा खोल दिया है और इसके विरोध में आज पार्टी पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन कर सड़कों पर उतरने वाली है.

आपको बता दें कि ED द्वारा राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक के कोलकाता स्थित कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी ने राज्य के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई के खिलाफ ही आज यानी शुक्रवार दोपहर 2 बजे एक विशाल विरोध रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करने वाली है. गुरुवार दोपहर को जब ईडी के अधिकारियों ने आई-पैक के ठिकानों पर तलाशी शुरू की, तो घटनाक्रम ने उस वक्त नाटकीय मोड़ ले लिया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं. उनके पहुंचने से कुछ ही मिनट पहले कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा भी वहां मौजूद थे. मुख्यमंत्री लगभग 20 से 25 मिनट तक आवास के भीतर रहीं और जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरे रंग का फोल्डर देखा गया.

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आंतरिक दस्तावेजों, हार्ड डिस्क और चुनाव रणनीति से जुड़े संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को असंवैधानिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया. मुख्यमंत्री के अनुसार, आई-पैक न केवल चुनाव परामर्श देता है, बल्कि पार्टी के आईटी सेल और मीडिया संचालन का भी प्रबंधन करता है, ऐसे में वहां से डेटा चोरी करना पार्टी की गोपनीयता का हनन है.
वहीं मीडियाकर्मियों से बात चीत करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को डराने-धमकाने के लिए संवैधानिक एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता ने कहा, यह कानून का पालन नहीं है, बल्कि देश के गृह मंत्री का काम करने का एक तानाशाही तरीका है. मुझे खेद है कि अमित शाह जी जैसे व्यक्ति पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री को अपने गृह मंत्री पर नियंत्रण रखना चाहिए.

यह घटनाक्रम साल 2019 की उस याद को ताजा कर गया जब सीबीआई ने तत्कालीन पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के आवास पर छापेमारी की थी. उस समय भी ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थीं और बाद में केंद्र के खिलाफ धरने पर बैठ गई थीं. गौरतलब है कि मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी चुप्पी तोड़ी और स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं थी. ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह तलाशी अभियान राज्य में चल रहे कोयला तस्करी सिंडिकेट की जांच का हिस्सा था. जांच एजेंसी का आरोप है कि अनूप माजी के नेतृत्व में ईसीएल के लीज वाले क्षेत्रों से अवैध कोयला खनन और चोरी की जा रही थी, जिसके वित्तीय लेन-देन के तार इन ठिकानों से जुड़े हो सकते हैं.

ईडी ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तलाशी की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों के आगमन के बाद जांच में बाधा उत्पन्न हुई.एजेंसी का दावा है कि वहां से कुछ महत्वपूर्ण भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जबरन हटा दिए गए, जिससे जांच की गोपनीयता और निष्पक्षता प्रभावित हुई है. ईडी ने बीते कल ही कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर भी कर दी थी. जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक ऑफिस और इसके सह-संस्थापक के घर पर छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप करके जांच में बाधा डाली. एजेंसी का दावा है कि उन्होंने जबरन तलाशी स्थल से सबूत हटाए. इस मामले की सुनवाई आज ही कलकत्ता हाई कोर्ट में होने की उम्मीद है.

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का केंद्रीय एजेंसी की जांच के बीच में जाना अनैतिक और असंवैधानिक है. अधिकारी ने सवाल उठाया कि अगर आई-पैक एक निजी परामर्श फर्म है, तो तृणमूल कांग्रेस के संवेदनशील दस्तावेज वहां क्या कर रहे थे? उन्होंने मुख्यमंत्री पर बार-बार जांच में बाधा डालने और संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ने का आरोप लगाया.
बहरहाल,मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज शुक्रवार को जादवपुर 8बी बस स्टैंड से हाजरा क्रॉसिंग तक 5 किलोमीटर लंबी एक विरोध रैली का आह्वान किया है. उन्होंने समर्थकों से भारी संख्या में जुटने की अपील की है ताकि केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से लोकतंत्र की हत्या” के खिलाफ आवाज उठाई जा सके.

तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति और डिजिटल डेटा को निशाना बनाकर भाजपा उसे कमजोर करना चाहती है. वहीं, भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई बता रही है. फिलहाल, कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आज की रैली पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं.

एयर नाऊ स्पेशल

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