Monday, September 14, 2026

चाईबासा के सारंडा में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, 2 दिनों में 17 माओवादी ढेर

सारंडा: झारखंड के माओवादी गढ़ सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। दो दिनों तक चले ऑपरेशन मेगाबुरू में माओवादियों की रीढ़ टूट गई है। इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 17 हार्डकोर माओवादियों के शव बरामद किए हैं। मारे गए माओवादियों में एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी अनल भी शामिल है। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इस अभियान में सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और जिला पुलिस बल शामिल हैं। सभी बलों ने तालमेल के साथ जंगल में सघन सर्च अभियान चलाया और माओवादियों के ठिकानों को ध्वस्त किया।

माओवाद खत्म करने का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मार्च 2026 तक राज्य से माओवादियों के सफाए का लक्ष्य तय किया है। इसी रणनीति के तहत माओवादी इलाकों में लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है। ऑपरेशन मेगाबुरू को सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह, झारखंड पुलिस आईजी अभियान डॉ. माइकल राज एस., झारखंड जगुआर आईजी अनूप बिरथरे और डीआईजी इंद्रजीत महथा द्वारा निर्देशित और मॉनिटर किया जा रहा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार अब बचे हुए करीब 45 माओवादी पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा और किरीबुरू थाना क्षेत्र की सीमा में घिर चुके हैं।

मिसिर बेसरा के नेतृत्व में फंसे माओवादी

घिरे हुए माओवादियों का नेतृत्व पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा कर रहा है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह गांव का निवासी है। उसके बाद संगठन में दूसरे नंबर पर सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर है, जिस पर भी एक करोड़ का इनाम है। खुफिया जानकारी के मुताबिक माओवादियों ने अपने चारों ओर आईईडी लगाकर सुरक्षा घेरा बना रखा है। उनके पास एके-47, इंसास, एसएलआर और थ्री नॉट थ्री जैसे हथियार हैं।

हथियार और कारतूस सीमित

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार माओवादियों की हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई ठप हो चुकी है। वे अब पुराने संसाधनों के सहारे ही संघर्ष कर रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति कमजोर होती जा रही है। सूचना यह भी है कि घिरे हुए माओवादियों में से कई आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो और गोइलकेरा थाना क्षेत्र अब पूरी तरह माओवादी मुक्त हो चुके हैं। कभी माओवादियों का गढ़ रहे ये इलाके अब सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं। टोंटो थाना क्षेत्र का सारजमबुरू इलाका लंबे समय तक माओवादियों की शरणस्थली रहा है। सुरक्षा दबाव बढ़ने के बाद माओवादी यहां से भागकर छोटानागरा और किरीबुरू क्षेत्र में सिमट गए।

ओडिशा से झारखंड तक घेराबंदी

माओवादियों की घेराबंदी के लिए प्रभावित इलाकों में आठ अस्थायी सुरक्षा कैंप बनाए गए हैं। एक ओर ओडिशा सीमा और दूसरी ओर झारखंड की तरफ से सुरक्षा बल लगातार घेरा कस रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए जल्द माओवादियों के खिलाफ निर्णायक सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है और झारखंड को नक्सल हिंसा से मुक्त करने की दिशा में यह अभियान अहम साबित होगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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