रांची : झारखंड के खेल जगत के लिए यह एक बेहद दुःखद खबर है। वरिष्ठ एथलीट, अनुभवी प्रशिक्षक और खेल आंदोलन को नई दिशा देने वाले ‘कोल्हान के दद्दू’ के नाम से मशहूर टिपरिया तियु का निधन हो गया है। उनके जाने से न केवल पश्चिमी सिंहभूम जिला, बल्कि पूरा झारखंड एक ऐसे व्यक्ति से वंचित हो गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन खेल और युवाओं के निर्माण को समर्पित कर दिया था।
Highlights:
टिपरिया तियु ने महज 19 साल की उम्र में टाटा स्टील में नौकरी पाने के उद्देश्य से घर से बाहर निकले थे। उस समय उन्होंने शायद यह नहीं सोचा था कि दौड़ ही उनके जीवन की पहचान बन जाएगी। धीरे-धीरे दौड़ उनका शौक बनी, फिर साधना और अंत में जीवन का उद्देश्य।
लगभग 600 पदक जीते
अपने लंबे खेल जीवन में उन्होंने इंटर डिस्ट्रिक्ट, नेशनल, एशियाड और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्होंने 106 स्वर्ण पदकों सहित लगभग 600 पदक जीते। यह उपलब्धि उन्हें देश के सफल मास्टर्स एथलीटों में एक खास स्थान दिलाती है।
35वीं नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप
सबसे खास बात यह रही कि 73 वर्ष की उम्र में भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ था। वे आगामी 35वीं नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे और रोज लगभग 10 किलोमीटर दौड़ लगाते थे। उनका जीवन इस बात का उदाहरण था कि उम्र कभी भी मेहनत और संकल्प के आड़े नहीं आती।
1300 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण
खूंटपानी प्रखंड के छोटे से गांव गिंडीमुंडी से निकलकर उन्होंने हजारों युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने लगभग 1300 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया और उन्हें राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। महिला फुटबॉल की शुरुआत कर उन्होंने खेल में बराबरी की दिशा में भी अहम कदम उठाया।


