रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने चाईबासा सदर अस्पताल से जुड़े एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2025 में अस्पताल में इलाज के दौरान पांच नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को संक्रमित खून चढ़ाए जाने के बाद HIV संक्रमण होने के मामले में हाईकोर्ट ने तुरंत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर मेडिकल लापरवाही और सिस्टम की विफलता से जुड़ा मामला माना है। बुधवार को बच्चों के परिजनों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की बेंच ने पुलिस को बिना देरी FIR दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दर्ज की गई FIR की एक प्रति शिकायतकर्ताओं को दी जाए और इसकी जानकारी काउंटर एफिडेविट के माध्यम से अदालत में दाखिल की जाए। यह याचिका हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद शादाब अंसारी के माध्यम से दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण पांच नाबालिग बच्चों को संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। इस घटना को अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया गया है।
Highlights:
पीड़ित बच्चे और उनकी स्थिति
पीड़ित बच्चे 5 से 7 वर्ष की उम्र के हैं और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण उन्हें नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। HIV संक्रमण के बाद इन बच्चों और उनके परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में बताया गया कि सभी पीड़ित हाशिए पर पड़े समुदायों से आते हैं, जिससे उनकी समस्याएं और भी बढ़ गई हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में प्रत्येक पीड़ित बच्चे को ₹2 लाख मुआवजा देने की घोषणा की थी। हालांकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह राशि जीवन भर चलने वाले इलाज और देखभाल के लिए पूरी तरह से नाकाफी है। HIV जैसे गंभीर संक्रमण के इलाज में लगातार दवाइयों, जांच और विशेष देखभाल की जरूरत होती है, जिसका खर्च कहीं अधिक है।
SIT जांच की मांग
याचिका में कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक दोषियों की सही पहचान और जवाबदेही तय नहीं हो पाएगी।हाईकोर्ट का यह आदेश इस मामले में आपराधिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब अगली सुनवाई में अदालत SIT के गठन और आगे की जांच प्रक्रिया पर विचार करेगी। इस फैसले से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद बंधी है।


