राँची: झारखंड के 1984 सिख दंगा पीड़ितों के लिए सोमवार का दिन झारखंड हाई कोर्ट से राहत की एक नई किरण लेकर आया। कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा दिलाने और आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में वन मैन कमीशन के गठन का आदेश दिया है।
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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंगों के घाव आज भी हरे हैं और पीड़ितों को उनका हक मिलना अनिवार्य है। जस्टिस डी.पी. सिंह के आकस्मिक निधन के बाद यह पद रिक्त था, जिसे अब जस्टिस गौतम कुमार चौधरी संभालेंगे।
क्यों पड़ी नए कमीशन की जरूरत?
बता दें कि इस मामले की देखरेख पहले जस्टिस डी.पी. सिंह कर रहे थे। लेकिन 8 मार्च को उनके निधन के बाद पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। पीड़ितों के बीच अनिश्चितता का माहौल था, जिसे देखते हुए हाई कोर्ट ने तुरंत नए आयोग के गठन का निर्णय लिया ताकि न्याय की प्रक्रिया में और देरी न हो।
कमीशन का क्या होगा मुख्य काम?
नए गठित वन मैन कमिशन दावों की वैधता की जांच करेगा और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपना है। कमिशन मुआवजे की मांग करने वाले पीड़ितों के दस्तावेजों और दावों की बारीकी से जांच करेगा। जांच के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को देगा, जिसके आधार पर अंतिम मुआवजा राशि तय की जाएगी। इसके साथ ही दंगे से जुड़े लंबित आपराधिक मुकदमों की प्रगति पर भी यह कमीशन पैनी नजर रखेगा।
41 को मिल मुआवजा, कतार में कई अन्य
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 41 पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है। इस राहत के बाद बड़ी संख्या में अन्य पीड़ितों ने भी याचिकाएं दाखिल कर मुआवजे की मांग की है। नए कमीशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन नए आवेदकों की पात्रता की निष्पक्ष जांच करना होगा ताकि असली पीड़ितों को उनका हक मिल सके।
एक लंबी लड़ाई
1984 का वह काला अध्याय आज भी कई परिवारों को कचोटता है। झारखंड के कई शहरों में सिखों ने अपनी संपत्ति और अपनों को खोया था। हाई कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि भले ही वक्त ज्यादा बीत गया हो, लेकिन न्याय की फाइलें अभी बंद नहीं हुई हैं।

