जमशेदपुर : शहर के कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण के आठ दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। इस बीच पुलिस का शक अब अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिंह गिरोह पर है। अजय बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज का रहने वाला है। वह गया के डॉक्टर दंपती पंकज गुप्ता और उनकी पत्नी शुभ्रा गुप्ता के अपहरण में गया जेल में सजा काट रहा है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि पुलिस जल्द ही पूछताछ के लिए उसे रिमांड पर लेगी।
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अजय का गिरोह हाई प्रोफाइल लोगों का अपहरण करता है। इसके लिए वह पुलिस की वर्दी और पुलिस लिखे वाहनों के साथ नीली-लाल बत्ती का भी इस्तेमाल करता है। फिलहाल वह जेल से ही नेटवर्क को चला रहा है। जिस तरह कैरव का अपहरण किया गया, उसकी मॉडस ऑपरेंडी भी वैसी ही है। अजय सिंह गिरोह अपहरण के बाद नशीले इंजेक्शन का उपयोग करता है, ताकि पीड़ित को पता न चले कि उसे कहां ले जाया जा रहा है। वहीं, वह फिरौती के लिए पांच से बीस करोड़ तक की मांग करता है। अपहरण के आठ से दस दिन के बाद ही फिरौती मांगता है।
2003 में मिली थी उम्रकैद
साल 2003 में जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी की पत्नी सुमेधा दुर्लभजी के अपहरण में उसे उम्रकैद हुई थी। साल 2011 में वह पेरोल पर बाहर आया और फिर लापता हो गया था। अजय सिंह गिरोह ने साल 2015 में गया के डॉ. पंकज गुप्ता और शुभ्रा गुप्ता का एनएच-2 से अपहरण कर लिया था। अजय ने दोनों को वीआईपी काफिले वाली स्टाइल में अगवा किया था। इसके पूर्व उसने रोहतास के एक बड़े ठेकेदार को अगवा किया था। उसका नेटवर्क बंगाल, यूपी, राजस्थान और गुजरात तक फैला है।
औरंगाबाद या यूपी ले जाने की आशंका
पुलिस लिखी जिस स्कॉर्पियो की तलाश की जा रही है, वह आखिरी बार बुंडू टोल प्लाजा में दिखी थी। इसके बाद उसे ट्रेस नहीं किया जा सका है। पुलिस अब यह कयास लगा रही है कि संभवत: कार लोहरदगा और गढ़वा के रास्ते औरंगाबाद , यूपी गई हो। पुलिस अब इस रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि 13 जनवरी को जमशेदपुर के कदमा-सोनारी लिंक रोड से कैरव गांधी का अपहरण कर लिया गया था। कैरव की कार कांदरबेड़ा के पास लावारिस हालात में मिली थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि सफेद रंग की कार से कैरव का अपहरण किया गया है। बाद में कैरव के पिता देवांग गांधी को फिरौती के लिए फोन भी आने लगे।


