मुंबई : महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के दौरान मतदान के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया। 15 जनवरी को जैसे ही वोटिंग शुरू हुई, सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो में दावा किया गया कि वोट डालने के बाद मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही को नेल पॉलिश रिमूवर, सैनिटाइज़र या एसीटोन जैसे केमिकल से आसानी से हटाया जा सकता है। इन वीडियो के सामने आते ही यह सवाल उठने लगा कि क्या इस बार इस्तेमाल की गई स्याही वास्तव में इंडेलिबल यानी न मिटने वाली है या नहीं।
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15 जनवरी की सुबह 7:30 बजे मुंबई समेत महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में मतदान शुरू हुआ। इस चुनाव में कुल करीब 3.48 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें अकेले मुंबई में ही एक करोड़ से अधिक वोटर शामिल हैं। बीएमसी चुनाव को राज्य की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है। बीएमसी के 227 वार्डों में करीब 1,700 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
दिनभर मतदान के आंकड़े लगातार अपडेट होते रहे। सुबह शुरुआती घंटों में मुंबई में मतदान लगभग 6.98 प्रतिशत रहा। दोपहर तक यह आंकड़ा बढ़कर 17.73 प्रतिशत पहुंच गया। शाम 4:30 बजे तक कुल मतदान 41.08 प्रतिशत दर्ज किया गया। प्रशासन का कहना है कि मतदान शाम 5:30 बजे तक जारी रहा और अंतिम आंकड़े उसके बाद ही स्पष्ट होंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 50 फीसदी से ऊपर जा सकता है।
वायरल वीडियो से उठा स्याही विवाद
इसी मतदान प्रक्रिया के बीच सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे चुनाव को चर्चा के केंद्र में ला दिया। वीडियो में दिखाया गया कि उंगली पर लगी स्याही को कुछ केमिकल से रगड़कर हटाया जा सकता है। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि अगर स्याही हट सकती है, तो क्या कोई व्यक्ति दोबारा वोट डाल सकता है। यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक बहस का रूप लेने लगा और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे।
इस विवाद को राजनीतिक हवा तब मिली जब राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि इस बार पारंपरिक इंडेलिबल स्याही की जगह मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज ठाकरे ने कहा कि अगर स्याही आसानी से मिट रही है, तो यह चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) समेत कई विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया।
उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पहले ईवीएम पर सवाल उठे, फिर वोटर लिस्ट पर, और अब वोट डालने के बाद उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही पर भी भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि भले ही एक भी फर्जी वोट साबित न हुआ हो, लेकिन इस तरह के विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं।
राज्य चुनाव आयोग की सफाई
विवाद बढ़ता देख महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग सामने आया और उसने स्थिति पर सफाई दी। आयोग ने कहा कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है, लेकिन केवल स्याही हट जाने से कोई व्यक्ति दोबारा वोट नहीं डाल सकता। आयोग के अनुसार, जैसे ही कोई मतदाता वोट डालता है, उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो जाता है। ईवीएम में भी उसकी एंट्री रिकॉर्ड होती है। अगर वही व्यक्ति दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे अनुमति नहीं देता। आयोग ने यह भी कहा कि जानबूझकर स्याही हटाकर दोबारा वोट डालने की कोशिश करना चुनावी कदाचार है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
वीडियो भ्रामक : बीएमसी प्रशासन
बीएमसी प्रशासन ने भी वायरल वीडियो को भ्रामक बताया। अधिकारियों का कहना है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित है। प्रशासन के मुताबिक, मतदाता की पहचान केवल स्याही पर निर्भर नहीं होती, बल्कि पहचान पत्र, मतदाता सूची और ईवीएम रिकॉर्ड के जरिए सुनिश्चित की जाती है। बीएमसी अधिकारियों ने कहा कि स्याही हटने के वीडियो को पूरे वोटिंग सिस्टम से जोड़कर गलत निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों की राय
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक इंडेलिबल स्याही में सिल्वर नाइट्रेट होता है, जो त्वचा के भीतर तक असर करता है और कई दिनों तक नहीं मिटता। वहीं, अगर किसी जगह मार्कर या वैकल्पिक स्याही का इस्तेमाल हुआ है, तो वह त्वचा की सतह पर रहती है और कुछ केमिकल से हटाई जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आधुनिक चुनाव व्यवस्था में वोटिंग केवल स्याही पर आधारित नहीं होती, बल्कि कई स्तरों की जांच के बाद ही वोट दर्ज होता है।
सेलेब्रिटीज ने किया मतदान, दी अपील
विवाद के बीच भी मतदान प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रही। कई जानी-मानी हस्तियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और अभिनेता अक्षय कुमार समेत कई सितारों ने वोट डालने के बाद लोगों से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में भागीदारी हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
चुनाव का राजनीतिक महत्व
पूरे महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में कुल 2,800 से ज्यादा सीटों के लिए करीब 15,000 उम्मीदवार मैदान में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी चुनाव का असर राज्य की पूरी राजनीति पर पड़ेगा, क्योंकि बीएमसी का बजट और प्रशासनिक ताकत बेहद बड़ी है।
निष्कर्ष: सवाल भी, भरोसा भी
स्याही हटने के वायरल वीडियो ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जिससे फर्जी मतदान की पुष्टि हो सके। राज्य चुनाव आयोग और बीएमसी दोनों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित है और मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। यह चुनाव केवल वोट डालने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता के भरोसे की भी परीक्षा है। फिलहाल मतदान शांतिपूर्वक जारी है और आने वाले दिनों में जांच के नतीजे ही तय करेंगे कि यह विवाद महज अफवाह था या सिस्टम में सुधार की जरूरत है।


