फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद सेक्टर-77 में HSVP द्वारा की गई एक ई-नीलामी की समीक्षा करते हुए राइट टू सर्विस कमीशन ने आदेश दिया है कि भविष्य में किसी भी प्लॉट को ई-नीलामी में शामिल करने से पहले वहां सड़क, सीवरेज और बिजली जैसे सभी विकास कार्यों का पूरा होना अनिवार्य है। शिकायत पर आयोग ने सुनवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को 5 हजार रुपए मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं।
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क्या है मामला
फरीदाबाद के सेक्टर-77 में HSVP द्वारा की गई एक ई-नीलामी से यह मामला जुड़ा है। आवंटी मनोज वशिष्ठ ने एक प्लॉट खरीदा था, लेकिन विभाग ने बुनियादी विकास कार्य पूरे किए बिना ही उसकी नीलामी कर दी थी। साथ ही,
प्लॉट को रिकॉर्ड में पूरी तरह क्लियर बताने के बाद सामने की जमीन कानूनी तौर पर अधिग्रहण की प्रक्रिया में फंसी थी। इस कारण विकास न तो समय पर कब्जा ले सका और न ही निर्माण शुरू कर पाया, उल्टा विभाग ने उससे नियम विरुद्ध ‘एक्सटेंशन फीस’ भी वसूल ली। इसी लापरवाही का संज्ञान लेते हुए हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने विभाग को फटकार लगाई।
एस्टेट ऑफिसर को निर्देश
सरकार पर विश्वास करके आम नागरिक, नीलामी में भाग लेते हैं। ऐसे में यह विभाग की जिम्मेदारी है कि वह सभी आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करे ताकि आवंटी बिना किसी बाधा के निर्माण कार्य शुरू कर सके। आयोग ने एस्टेट ऑफिसर को निर्देश दिए हैं कि आवंटी को देय विलंबित ब्याज का भुगतान किया जाए, कब्जे की तिथि में आवश्यक संशोधन किया जाए तथा वसूली गई एक्सटेंशन फीस नियमानुसार वापस की जाए। इस संबंध में अनुपालना रिपोर्ट 5 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राइट टू सर्विस एक्ट के तहत
आयोग ने इस पूरे संदर्भ की विस्तृत जानकारी हरियाणा के मुख्य सचिव को भी भेज दी है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर सुधार करना है ताकि भविष्य में अधिकारी ऐसी लापरवाही न बरतें। आयोग ने प्रभावित आवंटी मनोज वशिष्ठ को हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट, 2014 के प्रावधानों के तहत 5,000 रुपए तक का मुआवज़ा प्रदान करने के आदेश दिए हैं, जिसका भुगतान एचएसवीपी द्वारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। साथ ही, विभाग को यह स्वतंत्रता दी गई है कि नियमानुसार यह राशि संबंधित अधिकारियों से वसूल की जा सके। राइट टू सर्विस कमीशन ने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में एचएसवीपी द्वारा ई-नीलामी प्रक्रिया में सभी विकास कार्यों को पूर्ण करने के उपरांत ही नीलामी की जाएगी तथा आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।


