महाराष्ट्र : हिजाब और प्रधानमंत्री पद को लेकर दिए गए बयानों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला। ओवैसी ने कहा कि हिमंत सरमा को संविधान की समझ नहीं है और उनके दिमाग में ट्यूबलाइट है।
ओवैसी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हिमंत सरमा ने संविधान की शपथ ली है, फिर भी वे ऐसे बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान में कहां लिखा है कि भारत का प्रधानमंत्री किसी एक धर्म का ही होगा। ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान के संविधान में यह लिखा है कि वहां केवल एक समुदाय का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है, लेकिन भारत का संविधान अलग है, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बनाया था।
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मामला क्या है
दरअसल, शनिवार को ओवैसी ने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी भी भारत की प्रधानमंत्री बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि जो पार्टियां आज देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाती हैं, उनकी राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि संवैधानिक रूप से प्रधानमंत्री बनने पर कोई रोक नहीं है और कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र है और प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही होगा। इसी बयान को लेकर ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
इस विवाद में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे भी कूद पड़े। उन्होंने कहा कि ओवैसी हिंदू राष्ट्र में इस तरह के बयान नहीं दे सकते। नितेश राणे ने यह भी कहा कि जो लोग ऐसे पदों पर बैठना चाहते हैं, उन्हें इस्लामिक देशों में जाना चाहिए।
हिजाब, संविधान और प्रधानमंत्री पद को लेकर दिए गए इन बयानों के बाद सियासत और गरमा गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने के आसार


