Wednesday, July 22, 2026

इंदौर के मौतों पर हाईकोर्ट की फटकार, रिपोर्ट को बताया आई-वॉश

इंदौर : इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को इस मामले में 30वीं मौत दर्ज की गई। भागीरथपुरा इलाके में रहने वाले 62 वर्षीय लक्ष्मी रजक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में उनकी किडनी खराब होने की जानकारी मिली और बाद में उनकी जान नहीं बच सकी।

सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन

इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी भागीरथपुरा निवासी खूबचंद (63) की दूषित पानी से मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद बुधवार को परिजनों ने अंतिम संस्कार से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि अब अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या घटकर 6 रह गई है, जिनमें से 3 आईसीयू में हैं और एक मरीज वेंटिलेटर पर है। इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार 27 फरवरी को सुनवाई हुई। करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार और नगर निगम पर सख्त सवाल उठाए। सुनवाई की शुरुआत में मुख्य सचिव अनुराग जैन कुछ देर के लिए वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे। सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि अब तक हुई 23 मौतों में से 16 मौतें दूषित पानी से, 4 को लेकर असमंजस है और 3 मौतें पानी से नहीं मानी गई हैं। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि मौतों की संख्या करीब 30 है।

हाईकोर्ट की फटकार

हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और यह मामला एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से जुड़ा है। कोर्ट ने सरकारी रिपोर्ट को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुरक्षित पानी की सप्लाई, इलाज और जांच के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। यह आयोग दूषित पानी के कारण, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा। कोर्ट ने आयोग को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए हैं और चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

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