Saturday, October 31, 2026

झारखंड में खाली पड़े लोकायुक्त एवं अन्य संवैधानिक पदों को लेकर हाई कोर्ट सख्त, सीएम की अध्यक्षता में 25 मार्च को बैठक

राँची: झारखंड में पिछले कई वर्षों से खाली पड़े संवैधानिक पदों को लेकर चल रही सुस्ती पर अब हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकायुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति न होने से नाराज अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

25 मार्च को सलेक्शन कमिटी की बड़ी बैठक

सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में इस मामले की अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए 25 मार्च को सलेक्शन कमिटी की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में इन रिक्त पदों को भरने पर अंतिम मुहर लग सकती है।

अदालत में सरकार और प्रार्थी के बीच तीखी बहस

प्रार्थी राजकुमार की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह ने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग जैसे संस्थान पिछले 3 से 5 साल से बिना मुखिया के चल रहे हैं। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार पिछले चार साल से सिर्फ समय मांग रही है, लेकिन नियुक्तियां जस की तस हैं। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आम जनता के अधिकारों का हनन भी है।

हाईकोर्ट कई बार दे चुका है चेतावनी

दरअसल, 18 मार्च को इस मामले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ होती हैं और उनमें अध्यक्ष व सदस्यों के पद खाली रहने से उनकी कार्यक्षमता पूरी तरह प्रभावित होती है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि सभी रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरकर संस्थाओं को सक्रिय किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि इसमें और देरी हुई तो अदालत कड़े आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगा।
प्रार्थी की दलील है कि पिछले चार वर्षों से राज्य सरकार की ओर से मामले में टाल मटोल किया जा रहा है. इस मसले पर कोर्ट कई बार जवाब तलब करने के साथ-साथ फटकार लगा चुका है। अब देखना है कि 25 मार्च को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस मसले को लेकर क्या फैसला होता है। 

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 1 अप्रैल को तय की है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर 25 मार्च की बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 1 अप्रैल को हाईकोर्ट सरकार के खिलाफ कोई कड़ा आदेश जारी कर सकता है।

क्यों अहम हैं ये नियुक्तियां?

झारखंड में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए लोकायुक्त और सूचना के अधिकार (RTI) को प्रभावी बनाने के लिए सूचना आयुक्त का होना अनिवार्य है। इन पदों के खाली होने से हजारों मामले लंबित हैं और जनता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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