रांची: झारखंड में नर्सिंग होम एवं हॉस्पिटल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर झारखंड ह्यूमन राइट कनफेडरेशन की जनहित याचिका पर सोमवार, 19 जनवरी को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। वहीं मामले में राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में कचरा प्रबंधन की बदहाली पर झारखंड हाई कोर्ट ने जवाब मांगा था। लेकिन रिम्स द्वारा जवाब दाखिल किया जिसपर कोर्ट ने असंतुष्टि जताई। सोमवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने रिम्स प्रबंधन के ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का टेंडर अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
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क्या है पूरा मामला?
यह याचिका राज्य के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों से निकलने वाले खतरनाक बायो-मेडिकल कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण को लेकर दायर की गई है। याचिकाकर्ता की मांग है कि राज्य में ‘बायो वेस्ट मैनेजमेंट हैंडलिंग रूल’ को कड़ाई से लागू किया जाए। साथ ही रिम्स में ठोस, सूखा और बायो-मेडिकल कचरा एक साथ मिलने और सही प्रबंधन न होने से संक्रमण के बढ़ते खतरे पर रोक लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही झारखंड में एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कचरे का निष्पादन अनिवार्य करने कि भी मांग कि गई है।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने रिम्स के जवाब को नाकाफी बताया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अस्पताल परिसर में जहाँ-तहाँ कचरा फेंका जाना स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने कोर्ट को बताया कि नए टेंडर की प्रक्रिया जारी है और कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। जिसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में रिम्स डायरेक्टर से सीधी जवाबदेही तय करते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में शपथ पत्र के माध्यम से बताएं कि टेंडर को पूर्ण करने के लिए अब तक ठोस कदम क्या उठाए गए हैं।
हाई कोर्ट ने इस मामले में अब रिम्स डायरेक्टर से सीधी जवाबदेही तय की है। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित की है। अब देखना यह है कि रिम्स प्रबंधन अगले 15 दिनों में टेंडर प्रक्रिया को कितना आगे बढ़ा पाता है और कोर्ट को क्या संतोषजनक जवाब दे पाता है।


